रायपुर: खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को उन्नत सरसों बीज वितरित – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 31 अक्टूबर 2026, रायपुर: रायपुर: खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को उन्नत सरसों बीज वितरित – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर में खेत बचाओ अभियान-रबी 2026 के तहत किसान जागरूकता एवं सरसों उन्नत बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को सरसों की उन्नत किस्म DRMR-150-35 के बीज वितरित किए गए। इन बीजों से लगभग 270 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण करना और रबी सीजन में तिलहनी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभियान का प्रमुख उद्देश्य किसानों के खेतों को स्वस्थ एवं उपजाऊ बनाए रखना, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना और दलहनी एवं तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। किसानों को कृषि की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकें अपनाकर उत्पादन लागत कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को जलाने के बजाय मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, मृदा संरचना में सुधार करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने धान की समय पर कटाई, खेत की उचित तैयारी और उपलब्ध समय का बेहतर उपयोग करते हुए रबी सीजन में दलहनी एवं तिलहनी फसलें लेने पर जोर दिया।

डॉ. पंकज शर्मा ने सरसों की खेती की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि सरसों कम बीज दर और सीमित सिंचाई में भी अच्छी उपज देने वाली महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। उन्होंने सरसों की उन्नत किस्म DRMR-150-35 की विशेषताओं के साथ बुवाई का समय, बीज दर, कतारों की दूरी, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई और अन्य आवश्यक कृषि क्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरसों की समय पर बुवाई करना जरूरी है। विशेष रूप से 30 नवंबर से पहले बुवाई करने और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाने पर लगभग 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है। यह किस्म लगभग 95 से 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इससे किसान कम अवधि में रबी सीजन की लाभकारी तिलहनी फसल प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना के लाभार्थी किसानों को लगभग 270 एकड़ क्षेत्र में बुवाई के लिए सरसों की उन्नत किस्म के बीज वितरित किए गए। किसानों ने उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत बीजों की उपलब्धता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे सरसों की खेती अपनाने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. के. सी. शर्मा और डॉ. प्रियंका मीना ने किया।

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