एग्रीवेट: 07 अक्टूबर 2026, शामली (उत्तर प्रदेश): शामली में सब्जी की फसलों पर कीटों का हमला, जिला उद्यान अधिकारी ने दी विस्तृत बचाव सलाह – उत्तर प्रदेश के शामली जिले में सब्जियों की कई फसलों पर अलग-अलग कीटों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। जिला उद्यान अधिकारी रचना सिंह ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए हर कीट के हिसाब से दवा और उसकी मात्रा की जानकारी दी है।
लौकी, कद्दू, करेला, तोरई और खीरा जैसी कद्दूवर्गीय फसलों में फल मक्खी का प्रकोप देखा गया है, जो फलों के अंदर अंडे देकर उन्हें अंदर से खराब कर देती है। इसकी रोकथाम के लिए क्यू-ल्योर फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर 15 से 20 की संख्या में लगाने की सलाह दी गई है।
शामली जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में शामिल है जहां किसान गन्ने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर सब्जियों की भी खेती करते हैं। बरसात के बाद का मौसम नमी और गर्माहट दोनों के मिश्रण की वजह से कीटों के पनपने के लिए अनुकूल माना जाता है, जिसकी वजह से इस समय सब्जी के खेतों में कई तरह के कीट एक साथ सक्रिय हो गए हैं।
फल मक्खी के जैविक नियंत्रण के लिए नीम सीड कर्नेल एक्सट्रैक्ट का तीन से पांच ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करने को कहा गया है। खेत में प्रभावित फलों को तुरंत तोड़कर मिट्टी में गाड़ देने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि इससे कीट के अगले जीवन चक्र को रोका जा सकता है।
बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक कीट का असर भी दिखा है, जिसके लिए प्रति हेक्टेयर 40 से 50 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। जरूरत पड़ने पर फ्लुबेंडियामाइड या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल का 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने को कहा गया है।
बैंगन के साथ-साथ मिर्च और टमाटर की फसलों में सफेद मक्खी का प्रकोप भी सामने आया है, जो पत्तियों का रस चूसकर पौधे को कमजोर करती है और वायरस जनित रोग भी फैला सकती है। इसके लिए नीले और पीले चिपचिपे जाल प्रति हेक्टेयर 35 से 40 की संख्या में लगाने की सलाह दी गई है। रासायनिक उपाय के तौर पर हल्के गर्म पानी में नीम का तेल तीन से पांच मिलीलीटर प्रति लीटर के अनुपात में घोलकर छिड़काव करने को कहा गया है।
जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से कहा है कि वे कीटनाशकों का छिड़काव करने से पहले खेत में कीट की वास्तविक संख्या जरूर जांच लें, ताकि जरूरत से ज्यादा दवा का इस्तेमाल न हो। शामली जिले में सब्जी की खेती बड़े रकबे में होती है, इसलिए समय रहते कीट नियंत्रण न होने पर किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जिला उद्यान अधिकारी के मुताबिक फेरोमोन और चिपचिपे जाल जैसे यांत्रिक उपायों को पहले अपनाने से किसानों को रासायनिक दवा पर होने वाला खर्च काफी कम करने में मदद मिलती है। इन ट्रैप से कीट की संख्या का भी पता चलता रहता है, जिससे किसान यह तय कर पाते हैं कि छिड़काव की वास्तव में जरूरत है या नहीं।
विभाग ने यह भी कहा है कि फल और सब्जी तोड़ने से पहले दवा छिड़काव और तुड़ाई के बीच कम से कम तय प्रतीक्षा अवधि का पालन जरूर करें, ताकि बाजार में बिकने वाली सब्जियों में दवा का असर न रहे। यह सलाह खास तौर पर उन किसानों के लिए दी गई है जो अपनी उपज सीधे मंडी या स्थानीय बाजार में बेचते हैं।