एग्रीवेट: 28 सितंबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: 55 हेक्टेयर में अरहर की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन, फूल आने की अवस्था में पहुंची फसल – छत्तीसगढ़ में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों तक अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीक पहुंचाने के लिए आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत सरगुजा जिले में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा की ओर से चयनित गांवों में किसानों के खेतों पर 55 हेक्टेयर रकबे में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और छत्तीसगढ़ अरहर-2 किस्मों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया है। वर्तमान में फसल अच्छी बढ़वार और शाखाओं के विकास के साथ पूर्व-फूलावस्था से फूल आने की शुरुआती अवस्था में पहुंच गई है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल और निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देशानुसार तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके तहत अंबिकापुर विकासखंड के सोहगा, बरकेला, खजुरी और नानदमाली तथा उदयपुर विकासखंड के कुमडेवा गांव में किसानों के खेतों पर अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों से जोड़कर दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदर्शन वाले खेतों में अरहर के पौधों की ऊंचाई, हरित वृद्धि और शाखाओं का अच्छा विकास देखा जा रहा है। फसल अब उस महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच रही है, जहां फूल आने के बाद फलियों का विकास होगा। ऐसे में इस समय फसल का उचित प्रबंधन उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने, खरपतवार नियंत्रण और नमी प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ कीट एवं रोगों की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से फूल और फली बनने की अवस्था में फली छेदक सहित अन्य कीटों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार ही कीटनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों का सीड हब के अंतर्गत बीज पंजीयन भी कराया गया है। इससे किसानों को उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन की तकनीक से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण दलहन बीज उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. पी.आर. पैकरा, डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य और डॉ. लीलाधर साहू किसानों को अरहर की उन्नत उत्पादन तकनीक, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और समन्वित कीट प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार फूल आने से पहले फसल की उचित देखभाल आगे बनने वाले फूल और फलियों की संख्या के साथ उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण कर आवश्यक कृषि कार्य समय पर करने की सलाह दी गई है। प्रदर्शन वाले खेतों में अरहर की फसल की अच्छी स्थिति से किसानों में उन्नत तकनीक के माध्यम से दलहन उत्पादन बढ़ाने को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को फसल की प्रत्येक अवस्था में आवश्यक प्रबंधन और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्नत किस्मों के प्रदर्शन के साथ उनकी उत्पादन तकनीक भी किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।