तमिलनाडु में 16 साल में भूजल की सबसे खराब स्थिति, सभी 38 जिलों में गिरा जलस्तर—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: तमिलनाडु में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है. राज्य के सभी 38 जिलों में इस साल सितंबर में भूजल स्तर पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले नीचे चला गया. किसी भी जिले में सुधार दर्ज नहीं किया गया. अल नीनो की स्थिति के बीच भूजल स्तर में आई इस गिरावट ने पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. राज्य में पिछले 16 साल में भूजल की यह सबसे खराब स्थिति बताई जा रही है. दरअसल, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई है. ऐसे में अब लोगों को उत्तर-पूर्वी मॉनसून से अच्छी बारिश की उम्मीद है, ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके. हालांकि, मौजूदा आंकड़े राज्य में जल संकट की गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं.

भूजल स्तर में गिरावट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2017 में तंजावुर जिले में भूजल स्तर 1.12 मीटर बढ़ा था, जबकि बाकी जिलों में गिरावट दर्ज की गई थी. लेकिन इस साल सितंबर में राज्य के किसी भी जिले में भूजल स्तर में सुधार नहीं हुआ. इससे तमिलनाडु में भूजल संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में भूजल स्तर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. जल संसाधन विभाग (WRD) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में यहां जमीन से 3.68 मीटर नीचे भूजल उपलब्ध था. सितंबर 2026 में यह गहराई बढ़कर 7.56 मीटर हो गई. यानी भूजल स्तर 3.88 मीटर नीचे चला गया. कोयंबटूर जिले में भी भूजल स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. यहां सितंबर 2025 में भूजल 10.28 मीटर की गहराई पर था, जो सितंबर 2026 में 13.73 मीटर तक पहुंच गया. इस तरह यहां भूजल स्तर 3.45 मीटर गिरा. वहीं, तिरुप्पुर जिले में सितंबर 2025 में भूजल 9.01 मीटर नीचे था, जबकि सितंबर 2026 में यह 11.62 मीटर की गहराई पर पहुंच गया. यानी यहां भूजल स्तर में 2.61 मीटर की गिरावट आई. इन आंकड़ों से राज्य में बढ़ते भूजल संकट का पता चलता है.

तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों में भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है. इसकी एक बड़ी वजह उद्योगों, खेती और घरेलू जरूरतों के लिए पानी की बढ़ती मांग है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोयंबटूर में कपड़ा और ऑटोमोबाइल से जुड़े कई उद्योग हैं. इनकी वजह से पानी की मांग काफी ज्यादा है. हालांकि, भूजल स्तर में गिरावट के लिए उद्योगों से पानी निकालने की भूमिका कितनी है, इसका अभी आकलन किया जाना बाकी है.

अधिकारियों के मुताबिक, इस साल तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से पर्याप्त बारिश नहीं हुई. इससे बांधों, जलाशयों और दूसरे जल स्रोतों में पानी का भंडारण कम रहा. कम बारिश के कारण जमीन के नीचे पानी जमा होने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है. अल नीनो की स्थिति ने भी चिंता बढ़ाई है. अब राज्य को उत्तर-पूर्वी मॉनसून से अच्छी बारिश की उम्मीद है, ताकि जलाशयों, झीलों और भूजल स्रोतों में पानी की भरपाई हो सके.

अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2022 से सितंबर 2026 के बीच कोयंबटूर में भूजल स्तर 6.09 मीटर नीचे चला गया. इसी अवधि में इरोड में 5.4 मीटर और कल्लाकुरिची में 4.95 मीटर की गिरावट दर्ज की गई. अधिकारियों का कहना है कि भूजल स्तर में सुधार के लिए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना और स्थानीय जल स्रोतों को सुरक्षित रखना जरूरी है. खासकर औद्योगिक और शहरी इलाकों में बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी. इससे भूजल का दोबारा भंडारण बढ़ाने और पानी की कमी को कम करने में मदद मिल सकती है.

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