एग्रीवेट: हरियाणा के गुरुग्राम में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए नगर निगम ने 94 ट्यूबवेल बंद करने का प्रस्ताव दिया है. नगर निगम के कुल 581 ट्यूबवेल में से इनकी पहचान की गई है. योजना के तहत जनवरी 2027 तक इन ट्यूबवेल को बंद करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भूजल का जरूरत से ज्यादा दोहन रोका जा सके. नगर निगम आयुक्त ने 6 अक्टूबर को यह मसौदा योजना गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजी थी. प्रस्ताव के मुताबिक, चिन्हित ट्यूबवेल को 90 दिनों के भीतर बंद किया जाना है. यह कदम पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है.
दरअसल, भूजल के दोहन से जुड़ी एक याचिका वर्ष 2008 में हाई कोर्ट में दायर की गई थी. समय के साथ यह मामला गुरुग्राम में पानी के प्रबंधन और भूजल संरक्षण से जुड़े व्यापक मुद्दों तक पहुंच गया. अब इस योजना के जरिए शहर में भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 22 सितंबर के अपने आदेश में गुरुग्राम में पीने योग्य पानी की लगातार बनी कमी पर चिंता जताई. कोर्ट ने यह भी कहा कि बारिश के पानी का भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम में बंद किए जाने वाले 94 ट्यूबवेल उन सेक्टरों और विकसित शहरी इलाकों में हैं, जहां गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) की ओर से नहर के पानी की पर्याप्त सप्लाई होती है. इन ट्यूबवेल को बंद करने से रोजाना करीब 97 लाख लीटर भूजल का दोहन कम होने की उम्मीद है. वहीं, बाकी 487 ट्यूबवेल की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी. इनसे रोजाना करीब 5.03 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई होती है. GMDA की नहर आधारित जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही इन ट्यूबवेल को भी चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा.
केंद्रीय भूजल बोर्ड के 2024 के आकलन के मुताबिक, गुरुग्राम शहरी क्षेत्र में भूजल दोहन का स्तर 326.52 फीसदी है. इसका मतलब है कि शहर में हर साल भूजल जितना रिचार्ज होता है, उससे तीन गुना से भी ज्यादा पानी निकाला जा रहा है. भूजल पर दबाव कम करने के लिए नगर निगम ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है. योजना के तहत पार्कों में सिंचाई जैसे कामों के लिए पीने योग्य पानी की जगह ट्रीटेड सीवेज वॉटर यानी शोधित गंदे पानी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा. फिलहाल, शोधित पानी की पाइपलाइन 49.8 किलोमीटर क्षेत्र में फैली है और इससे 142 पार्कों को पानी मिलता है. मार्च 2027 तक इस नेटवर्क को बढ़ाकर 104.951 किलोमीटर करने और 312 पार्कों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. इसके विस्तार के लिए 55.151 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन की आधारशिला 5 जून को रखी गई थी. इससे 170 और पार्कों को जोड़ा जाएगा.
गुरुग्राम में बारिश के पानी को जमा करने के लिए 277 मॉड्यूलर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं बनाने की मंजूरी दी गई है. इनमें से 145 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 81 पर काम चल रहा है. बाकी 51 संरचनाओं के निर्माण के लिए अभी टेंडर जारी नहीं किए गए हैं. शहर के तालाबों की स्थिति सुधारने पर भी योजना में जोर दिया गया है. इनमें से कई तालाबों पर अतिक्रमण है और विकास कार्यों में देरी हो रही है. गुरुग्राम में कुल 140 तालाबों की पहचान की गई है. इनमें से 113 नगर निगम गुरुग्राम (MCG) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. इन 113 तालाबों में से 32 का विकास पूरा हो चुका है, 21 पर काम चल रहा है, जबकि 60 तालाबों का विकास अभी शुरू नहीं हुआ है.