एग्रीवेट: भारत के नए UPI पेमेंट फ्रेमवर्क में कृषि इनपुट को जरूरी क्षेत्रों में शामिल किया गया है. अब 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये का Merchant डिस्काउंट Rate (MDR) तय किया गया है. इस व्यवस्था का मकसद जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट को आसान बनाए रखना है.
नए नियम के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के सामान्य P2M UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. वहीं, 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. हालांकि, कृषि इनपुट जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है. 2,000 रुपये से ज्यादा के कृषि इनपुट पेमेंट पर ट्रांजैक्शन की रकम चाहे जितनी हो, केवल 5 रुपये MDR लिया जाएगा. इस श्रेणी में कृषि इनपुट के अलावा ईंधन, रेलवे, टेलीकॉम और बीमा जैसे जरूरी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है.
इस व्यवस्था का फायदा रेहड़ी-पटरी लगाने वाले कारोबारियों, मोहल्ले की दुकानों और दूसरे छोटे कारोबारियों को मिलेगा. इसका मकसद छोटे कारोबारियों के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और UPI के इस्तेमाल को आसान बनाए रखना है. कृषि इनपुट और सेवाओं से जुड़े लेनदेन में भी डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे में कृषि क्षेत्र के लिए तय फ्लैट MDR से पात्र लेनदेन की लागत पहले से स्पष्ट रहेगी, क्योंकि इसमें सामान्य प्रतिशत के बजाय एक तय शुल्क लागू होगा.
वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को UPI पेमेंट के लिए नया फ्रेमवर्क जारी किया है. इसका मकसद UPI के लिए कमाई का एक सिस्टम तैयार करना है, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान और ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट को मुफ्त रखा जाए. सरकार के मुताबिक, करीब 96 फीसदी P2M यानी व्यक्ति से दुकानदार के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा.
नए UPI फ्रेमवर्क में छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को राहत दी गई है. इसके तहत P2PM यानी व्यक्ति से छोटे दुकानदार को होने वाले UPI पेमेंट में हर महीने 1 लाख रुपये तक की रकम पर MDR शून्य रहेगा. इसका मतलब है कि छोटे दुकानदारों को QR कोड के जरिए मिलने वाले इन पेमेंट पर कोई Merchant डिस्काउंट Rate (MDR) नहीं देना होगा.
नए UPI फ्रेमवर्क के तहत व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P पेमेंट पर किसी भी रकम के ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा. वहीं, दुकानदारों और कारोबारियों को 2,000 रुपये तक का UPI पेमेंट भी बिना MDR मिलेगा. सरकार के मुताबिक, करीब 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR के दायरे से बाहर रहेंगे. यानी केवल करीब 4 फीसदी मर्चेंट पेमेंट पर ही MDR लागू होगा.
MDR का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा. वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि दुकानदार इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें. वहीं, UPI ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस या किसी तरह का छिपा हुआ शुल्क नहीं लगा सकेंगी. वित्त मंत्रालय के मुताबिक MDR कोई टैक्स नहीं है और न ही यह सरकार या NPCI की ओर से लगाया गया शुल्क है. इससे मिलने वाली रकम पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग पक्षों, जैसे बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप कंपनियों के बीच बांटी जाएगी.