एग्रीवेट: 11 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: मछली पालकों को बीमा प्रीमियम पर 40 फीसदी तक मदद दे रही है केंद्र की यह योजना – मछली और झींगा पालन में मौसम, बीमारी या किसी अन्य वजह से होने वाले नुकसान का डर अब कुछ कम हो सकता है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना यानी पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत किसानों को मछली पालन का बीमा कराने पर प्रीमियम की लागत पर सीधी आर्थिक मदद दी जा रही है।
योजना के घटक 1-बी के तहत सामान्य श्रेणी के किसानों को बीमा प्रीमियम की लागत का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलता है, जो प्रति हेक्टेयर अधिकतम 25,000 रुपये है। एक किसान अधिकतम चार हेक्टेयर तक के लिए यह लाभ ले सकता है, यानी कुल मिलाकर एक लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
मछली और झींगा पालन में बाढ़, बीमारी के प्रकोप या जलवायु से जुड़ी किसी अन्य घटना से तालाब या टैंक में एक साथ बड़ा नुकसान हो सकता है, और ऐसे में अकेले किसान के लिए दोबारा पूंजी जुटाना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बीमा प्रीमियम पर यह सीधी नकद मदद देने की व्यवस्था बनाई है, ताकि किसान बीमा खरीदने से पीछे न हटें और नुकसान की स्थिति में उन्हें समय पर मुआवजा मिल सके।
केज कल्चर, बायोफ्लॉक, रेसवे और आरएएस जैसी आधुनिक मछली पालन प्रणालियों पर भी 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी सीमा भी एक लाख रुपये तक है। यह सुविधा 1,800 घन मीटर तक आकार की इकाइयों के लिए है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणी के किसानों से 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है। यह राशि एक फसल चक्र के लिए बीमा खरीदने पर राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
नुकसान होने पर किसान को तुरंत बीमा कंपनी को सूचित करना होता है, जिसके बाद एक क्षति मूल्यांकनकर्ता नुकसान का आकलन करता है। झींगा पालन से जुड़े दावों का निपटारा 30 दिनों में और बाकी जलीय कृषि के दावों का निपटारा 45 दिनों के भीतर करने का नियम है। इस योजना में ओरिएंटल इंश्योरेंस, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया, न्यू इंडिया एश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस जैसी कंपनियां शामिल हैं, और निजी बीमा कंपनियों को भी इससे जोड़ने का काम चल रहा है।
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक योजना के इस घटक के तहत 316 आवेदन मिले हैं, जो कुल 730.61 हेक्टेयर क्षेत्र से जुड़े हैं। इनमें से 127 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं, और 321.74 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को कुल 40.03 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि बांटी जा चुकी है। मछली पालकों के संगठनों का कहना है कि बीमा प्रीमियम पर यह मदद छोटे और मझोले किसानों को प्राकृतिक आपदा या बीमारी से होने वाले नुकसान के बाद दोबारा खड़ा होने में मदद करती है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पहले अपने तालाब, टैंक या पालन इकाई का पंजीकरण राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कराना होता है। इसके बाद ही वे किसी मान्यता प्राप्त बीमा कंपनी से अपनी इकाई का बीमा खरीद सकते हैं और प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं। अब तक मिले आवेदनों और स्वीकृतियों की संख्या देखकर कहा जा सकता है कि योजना अभी अपने शुरुआती चरण में ही है, और मछली व झींगा पालन वाले बड़े राज्यों में जैसे-जैसे जानकारी पहुंचेगी, आवेदनों की संख्या आगे बढ़ने की संभावना है।
मछली पालन में बीमा की भूमिका खेती के सामान्य फसल बीमा से कुछ अलग है, क्योंकि तालाब या टैंक में बाढ़ या बीमारी फैलने पर एक साथ पूरी पैदावार का नुकसान बहुत तेजी से हो सकता है। ऐसे नुकसान के बाद अगर किसान के पास बीमा न हो, तो उसे दोबारा तालाब तैयार करने और नया बीज खरीदने के लिए अक्सर कर्ज का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अगली फसल शुरू करने में भी देरी हो जाती है। प्रीमियम पर सीधी सब्सिडी मिलने से शुरुआती लागत का बोझ कुछ कम हो जाता है, जिससे ज्यादा किसान बीमा खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं।