एग्रीवेट: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है. करीब 45 दिनों से बारिश नहीं होने से आठ जिलों में 25 फीसदी से ज्यादा खड़ी फसलें सूखने का अनुमान है. कृषि विभाग के मुताबिक, फसल नुकसान का आधिकारिक पंचनामा अभी नहीं हुआ है. ऐसे में किसान फसल खराब होने से आर्थिक दबाव में हैं.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच अब तक मराठवाड़ा में 424.5 मिमी बारिश हुई है. यह इस अवधि की सामान्य औसत बारिश 679.5 मिमी का सिर्फ 69.2 फीसदी है. इसके मुकाबले पिछले साल इसी अवधि में क्षेत्र में सामान्य से 119 फीसदी बारिश हुई थी. ऐसेइस खरीफ सीजन में मराठवाड़ा के आठ जिलों में 47.69 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, कपास और मक्का समेत कई फसलों की बुवाई हुई है. ये जिले छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, नांदेड, परभणी, हिंगोली, धाराशिव और लातूर हैं.
कृषि अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र के कई हिस्सों में सोयाबीन की फसल पूरी तरह सूख गई है. मिट्टी में नमी की कमी के कारण सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ गई हैं. वहीं, कपास की फसल की बढ़वार रुक गई है, जिससे इसकी पैदावार प्रभावित होने की आशंका है. अधिकारियों का कहना है कि मक्का और अरहर (तूर) की फसलों की स्थिति भी खराब है. बारिश की लंबी कमी से किसानों की चिंता बढ़ गई है और फसल नुकसान का आधिकारिक आकलन होने का इंतजार है.
मराठवाड़ा के कुछ जिलों में शुक्रवार को हल्की से मध्यम बारिश हुई. बीड और नांदेड में भी बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने 22 सितंबर तक कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है. हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब होने वाली बारिश से किसानों को ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि फसलों को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है. अधिकारियों के मुताबिक, मराठवाड़ा के अलावा अमरावती संभाग के पांचों जिले भी लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. जून से सितंबर के बीच अब तक अमरावती संभाग में सामान्य औसत बारिश की करीब 72 फीसदी बारिश ही हुई है. इस अवधि में यहां औसतन 693 मिमी से ज्यादा बारिश होती है.
बारिश की कमी के कारण अमरावती संभाग में सोयाबीन की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में फसल सूखने की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है. महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा है कि कम बारिश से फसल नुकसान के मामले में मराठवाड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से फसलों के नुकसान का पंचनामा कराए जाने के बाद ही नुकसान की सही तस्वीर सामने आएगी. कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है और इसका आधिकारिक आकलन होने के बाद नुकसान की वास्तविक मात्रा पता चलेगी.