एग्रीवेट: Sugar Quota September 2026: देश में चीनी की सप्लाई को पूरे महीने संतुलित रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के लिए नया निर्देश जारी किया है. सरकार ने सितंबर महीने के चीनी कोटे को एक साथ बाजार में उतारने के बजाय दो चरणों में बेचने और माल की डिलीवरी तय समय पर करने को कहा है. इसके तहत मिलों को अपने सितंबर कोटे का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा 22 सितंबर तक बाजार में उतारना होगा. इसके बाद बचा हुआ 60 फीसदी कोटा 30 सितंबर तक बाजार में पहुंचाना जरूरी होगा. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पूरे महीने चीनी की सप्लाई बनी रहेगी और महीने के आखिर में अचानक बड़ी मात्रा में चीनी बाजार में आने से होने वाले उतार-चढ़ाव को रोका जा सकेगा. सरकार के निर्देश के मुताबिक, चीनी मिलों को सितंबर में मिले कुल कोटे का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा 22 सितंबर तक बेचना होगा और खरीदार तक उसकी डिलीवरी भी करनी होगी. यानी सिर्फ चीनी बेचने का सौदा करना काफी नहीं होगा, उसे तय समय में खरीदार तक पहुंचाना भी जरूरी है. पहली समय सीमा में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. ऐसे में मिलों को चीनी की बिक्री, उसे भेजने और खरीदार तक पहुंचाने की तैयारी तेजी से करनी होगी. पहले चरण के बाद मिलों को सितंबर के बचे हुए 60 फीसदी चीनी कोटे को 30 सितंबर तक बाजार में उतारना होगा. इस तरह पूरे महीने की सप्लाई दो हिस्सों में बाजार तक पहुंचेगी. सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि चीनी की उपलब्धता अचानक न बढ़े. अगर महीने के अंत में बड़ी मात्रा में चीनी एक साथ बाजार में आती है, तो सप्लाई पर दबाव बन सकता है. दो चरणों में माल आने से बाजार में चीनी की उपलब्धता ज्यादा नियमित रहने की उम्मीद है. सरकार के नए निर्देश के बीच घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में फिलहाल ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है. महाराष्ट्र में मिल स्तर यानी एक्स-मिल कीमत करीब 4,300 से 4,400 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है. वहीं, उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में एक्स-मिल भाव 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बना हुआ है. हाल के दिनों में इन कीमतों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में सप्लाई और मांग के बीच स्थिति काफी हद तक संतुलित बनी हुई है. चीनी उद्योग की नजर अब 22 सितंबर की पहली समय सीमा पर है. मिलों को तय समय तक 40 फीसदी कोटा बेचने के साथ खरीदारों तक चीनी पहुंचानी भी होगी. इसके बाद 30 सितंबर तक बाकी 60 फीसदी चीनी बाजार में भेजनी होगी. ऐसे में आने वाले दिनों में मिलों से चीनी की बिक्री और उसे भेजने का काम तेज हो सकता है. सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है, ताकि पूरे महीने बाजार में चीनी की कमी न हो. अब देखना होगा कि मिलें दोनों समय-सीमा के हिसाब से कितनी तेजी से चीनी बेचकर उसकी डिलीवरी करती हैं.