एग्रीवेट: एप्पल कीमत Drop Kashmir: सेब के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में कुछ किसान फसल को समय से पहले ही तोड़कर मंडियों में भेजने लगे हैं. इसका असर अब थोक बाजार में दिखने लगा है. ज्यादा मात्रा में कच्चे सेब मंडियों में पहुंचने से बाजार में माल बढ़ गया है और कीमतों में गिरावट आई है. कारोबारियों का कहना है कि अगर यही सिलसिला जारी रहा तो किसानों को अच्छे दाम मिलने की उम्मीद को झटका लग सकता है.
फिलहाल 15-16 किलो के एक कार्टन सेब का भाव करीब 700 से 1,000 रुपये चल रहा है. कुछ हफ्ते पहले यही कार्टन 1,100 से 1,700 रुपये तक बिक रहा था. यानी थोड़े ही समय में सेब के दाम में अच्छी-खासी गिरावट आई है.
फल मंडी शोपियां के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी ने बिजनेसलाइन की रिपोर्ट में बताया कि, सीजन की शुरुआत में निचले इलाकों से आने वाले सेब को अच्छे दाम मिले. इसे देखकर दूसरे इलाकों के कई किसानों ने भी अपनी फसल जल्दी तोड़नी शुरू कर दी. इनमें कुल्लू डिलीशियस और डिलीशियस जैसी किस्में भी शामिल हैं. समस्या यह है कि कई जगह सेब पूरी तरह तैयार होने से पहले ही तोड़ लिया गया और उसे दूसरे राज्यों की थोक मंडियों में भेज दिया गया. जब बड़ी मात्रा में कच्चा सेब बाजार में पहुंचा तो सप्लाई बढ़ गई. इससे कीमतों पर दबाव आया और भाव नीचे आने लगे.
कारोबारियों के मुताबिक, कश्मीर की अलग-अलग मंडियों में रोज करीब 18 लाख कार्टन सेब पहुंच रहा है. एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में माल आने से बाजार में सेब की भरमार हो गई है. कारोबारियों का कहना है कि निचले इलाकों में जल्दी तैयार होने वाले सेब को देखकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों ने भी समय से पहले तुड़ाई शुरू कर दी. इसके बाद इन इलाकों का कच्चा सेब भी मंडियों में पहुंचने लगा. इससे एक तरफ मौजूदा सीजन में कीमतों पर असर पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ आने वाले महीनों के लिए सेब की क्वालिटी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.
समय से पहले तोड़े गए सेब को नियंत्रित वातावरण यानी सीए स्टोरेज में रखने से भी खतरा बढ़ सकता है. पूरी तरह तैयार नहीं हुए सेब में स्टोरेज के दौरान कई तरह की दिक्कतें आने की संभावना रहती है. ऐसी ही एक समस्या में सेब की ऊपरी सतह का रंग काला पड़ने लगता है. इससे बाहर निकालने के बाद उसकी शक्ल और बाजार कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
सीए स्टोरेज संचालकों का कहना है कि, इन गोदामों में मुख्य रूप से अच्छी क्वालिटी यानी ए-ग्रेड सेब रखा जाना चाहिए. अगर कच्चा या कमजोर सेब लंबे समय तक स्टोर किया गया तो बाद में खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.
पिछले साल लंबे समय तक हुई बारिश के कारण कई इलाकों में सेब पेड़ों से गिरने लगे थे. नुकसान से बचने के लिए कई किसानों ने सेब पूरी तरह पकने से पहले ही तोड़कर सीए स्टोरेज में रख दिया था. लेकिन कुछ महीने बाद जब इन सेबों को बाजार में बेचने के लिए बाहर निकाला गया तो बड़ी मात्रा में फल खराब हो गए. इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इस साल भी कुछ किसान इसी तरह की जल्दबाजी कर रहे हैं, जिससे पिछले साल जैसी स्थिति दोहराए जाने की चिंता बढ़ गई है.
कश्मीर में सेब को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सीए स्टोरेज की जरूरत लगातार बढ़ रही है. फिलहाल यहां करीब 2.92 लाख मीट्रिक टन सेब रखने की क्षमता है, जबकि जरूरत लगभग 6 लाख मीट्रिक टन की बताई जा रही है. यानी मौजूदा क्षमता जरूरत से आधी से भी कम है. ऐसे में सेब की बढ़ती आवक के बीच सही क्वालिटी के फल को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है.