पराली जलाने की टेंशन खत्म! महिंद्रा ने लॉन्च की नई बुवाई मशीन, फसल अवशेष के बीच बो सकेंगे गेहूं – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Stubble Management: खेती में पराली जलाने की समस्या से निपटने और बुवाई का खर्च घटाने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने नई मशीन मैक्ससीडर का उत्पादन और बाजार में सप्लाई शुरू कर दी है. यह मशीन खेत में धान की बची हुई पराली के बीच ही अगली फसल की बुवाई कर सकती है. इससे किसानों को पराली हटाने या खेत तैयार करने में कम मेहनत करनी पड़ सकती है. कंपनी के मुताबिक, इस मशीन को चलाने के लिए 35 हॉर्स पावर या उससे अधिक क्षमता वाला ट्रैक्टर पर्याप्त है. इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से की जा रही है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कनाडा की कंपनी क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज से लाइसेंस लेकर मैक्ससीडर मशीन तैयार की है. इसका उत्पादन मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित कंपनी के खास कृषि मशीनरी कारखाने में किया जा रहा है. यह एक ऐसी मशीन है, जिससे धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी कई फसलों की बुवाई की जा सकती है. कंपनी इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध कराएगी. शुरुआत में पंजाब और हरियाणा के किसान महिंद्रा के कृषि उपकरण डीलरों के जरिए इसे खरीद सकेंगे. आगे दूसरे राज्यों में भी इसकी पहुंच बढ़ाने की योजना है.

आमतौर पर खेती की आधुनिक मशीनों को चलाने के लिए ज्यादा ताकत वाले ट्रैक्टर की जरूरत पड़ सकती है. लेकिन कंपनी का कहना है कि मैक्ससीडर को 35 एचपी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है.

इससे उन किसानों को भी आधुनिक बुवाई तकनीक अपनाने का विकल्प मिल सकता है, जिनके पास बहुत ज्यादा क्षमता वाला ट्रैक्टर नहीं है. हालांकि, मशीन खरीदने से पहले किसानों को अपने ट्रैक्टर की क्षमता, खेत की स्थिति और मशीन की जरूरतों के हिसाब से इसकी उपयुक्तता की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.

धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. खासकर पंजाब और हरियाणा में धान के बाद गेहूं की बुवाई का समय कम होने के कारण कई किसान पराली जल्दी हटाने के लिए उसे जला देते हैं. इससे हवा प्रदूषित होती है और मिट्टी को भी नुकसान पहुंच सकता है.

मैक्ससीडर की जीरो-टिल यानी बिना जुताई वाली तकनीक इसी समस्या का एक विकल्प पेश करती है. कंपनी के अनुसार, यह मशीन खेत में धान की बची पराली के बीच ही बीज बो सकती है. इससे पराली जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही खेत की मिट्टी को बार-बार जोतने की जरूरत भी घट सकती है.

कंपनी का कहना है कि मैक्ससीडर की खास तकनीक से बीज की बर्बादी और खाद के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है. अगर बीज और खाद का सही मात्रा में इस्तेमाल होता है, तो खेती की लागत घट सकती है और किसानों की कमाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. महिंद्रा के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में किए गए खेत परीक्षणों के दौरान मशीन ने धान की मोटी पराली के बीच भी बुवाई की. इन परीक्षणों में मिट्टी को कम छेड़ते हुए बीज बोने और खेती में इस्तेमाल होने वाले सामान की खपत घटाने की क्षमता देखी गई.

मैक्ससीडर किसानों के लिए पराली जलाने का विकल्प बन सकती है, लेकिन इसका असली फायदा खेत की स्थिति, फसल, मशीन की कीमत और चलाने के खर्च पर निर्भर करेगा. इसलिए किसान खरीदने से पहले कंपनी के डीलर से इसकी कीमत, रखरखाव, उपलब्धता और अपने इलाके में उपयोग की उपयुक्तता की जानकारी लें. मशीन के स्थानीय खेतों में प्रदर्शन को देखकर फैसला करना भी फायदेमंद रहेगा.

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