एग्रीवेट: त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विक्रेताओं और स्टॉक को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने नोटीफिकेशन जारी कर बताया है कि चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 1,000 क्विंटल निर्धारित की गई है. यह निर्देश आज 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे. बता दें कि बीते साल की तुलना में चीनी का खुदरा मूल्य अभी भी 11 रुपये प्रति किलो ज्यादा है.
केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के जरूरी वस्तुओं की मूल्य निगरानी समित ने चीनी के ताजा रिटेल प्राइस जारी किए हैं. अखिल भारतीय स्तर पर चीनी का खुदरा भाव 57.21 रुपये प्रति किलो है. यह दाम बीते माह की तुलना 2 रुपये जरूर कम है. लेकिन, बीते साल की तुलना में 11 रुपये अभी ऊपर बना हुआ है. 14 अक्तूबर 2025 को चीनी का खुदरा भाव 46.58 रुपये प्रति किलो था. वहीं, चीनी की थोक कीमत 5307.91 रुपये प्रति क्विंटल है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में 22 फीसदी से अधिक है.
चीनी की कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बजार उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को और सख्त किया है. ताजा फैसले के अनुसार चीनी व्यापारी के लिए चीनी स्टॉक अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है और स्टॉक रखने की सीमा 1,000 क्विंटल निर्धारित की गई है. केंद्र का यह निर्देश आज 15 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी.
चीनी व्यापारियों के लिए नए मानकों के तहत चीनी का स्टॉक मिलने की तारीख से 15 दिनों से अधिक समय तक चीनी को रोकने की मनाही है. इसके अलावा देश भर में किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं.
उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान के अनुसार कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों और असम राज्य में यह ताजा फैसला लागू नहीं किया गया है. इन क्षेत्रों के चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 2,000 क्विंटल निर्धारित की गई है. बता दें कि कोलकाता उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और इसे देश के पूर्वी हिस्से, जिसमें उत्तर-पूर्वी क्षेत्र भी शामिल है को आपूर्ति करता है. असम के लिए ऊपरी सीमा भौगोलिक बाधाओं, परिवहन व्यवस्था और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में उपभोक्ताओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है.
संशोधित नियमों का उद्देश्य यह पक्का करना है कि सप्लाई में चीनी का अनावश्यक स्टॉक न हो और चीनी मिलों से डीलरों के जरिए अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति ठीक से हो सके. यह उपाय विशेष रूप से जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा चीनी के भंडार में जमाखोरी को रोकने के लिए है. चीनी की मात्रा और भंडारण अवधि को सीमित कर सरकार आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से चीनी की व्यवस्थित आवाजाही को सुगम बनाना चाहती है और उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर इसकी निरंतर उपलब्धता पक्का करना चाहती है.