एग्रीवेट: Himachal एप्पल: हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम की मार से सेब की पैदावार प्रभावित हुई है. फूल आने के समय बेमौसम बारिश, ठंड में उतार-चढ़ाव और सेब के पेड़ों को जरूरी ठंड न मिलने से बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा. ऐसे में राज्य सरकार की बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) बागवानों के लिए सहारा बन रही है. योजना के तहत अब तक 13,200 टन से ज्यादा सेब खरीदे जा चुके हैं. सरकार ने पुराने बकाया भुगतान को लेकर भी जानकारी दी है और खरीद दर में एक रुपये की बढ़ोतरी की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है.
हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है. इस साल फूल आने के समय बेमौसम बारिश और ठंड ने फसल पर असर डाला. इसके अलावा, सेब के पेड़ों को अच्छी पैदावार के लिए जितने ठंडे घंटों (चिलिंग आवर्स) की जरूरत होती है, वे भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाए. मौसम की इन गड़बड़ियों के कारण सेब उत्पादन में गिरावट आई और बागवानों की चिंता बढ़ गई. ऐसे समय में सरकारी खरीद से उन बागवानों को सहारा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अपनी फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि, राज्य में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत अब तक 13,200 टन से अधिक सेब खरीदे गए हैं. यह खरीद हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता महासंघ (हिमफेड) के जरिए की गई है. इस योजना का मकसद बागवानों को उनकी उपज बेचने का सहारा देना है, ताकि बाजार में सही दाम न मिलने की स्थिति में उन्हें पूरा नुकसान न उठाना पड़े.
मंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार के समय बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 114 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था. मौजूदा सरकार अब तक किसानों और बागवानों को 262 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर चुकी है. इसके साथ ही योजना के तहत सेब की खरीद दर में एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की घोषणा भी की गई है. इस बढ़ोतरी से सेब बेचने वाले किसानों और बागवानों को अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, उन्हें मिलने वाली कुल रकम खरीदी गई उपज और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 से कम पेटियां रखने वाले 11,285 किसानों और बागवानों तथा 100 से कम पेटियां रखने वाले 2,827 लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में पैसा भेजा गया है. इस व्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी कहा जाता है.
वहीं, 100 से ज्यादा पेटियां रखने वाले करीब 7,000 किसानों और बागवानों की पहचान की गई है. इनमें से 2,000 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है. बाकी करीब 5,000 मामलों में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं, ताकि पात्रता की जांच पूरी की जा सके.
राज्य से इस सीजन अब तक करीब 1.23 करोड़ पेटियां सेब मंडियों तक पहुंच चुकी हैं. मौसम की मार के बीच बागवानों के लिए फसल का सही दाम और समय पर भुगतान सबसे अहम है. ऐसे में सरकारी खरीद और बकाया राशि का भुगतान उनके नुकसान को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है. अब बागवानों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाकी भुगतान और दस्तावेजों की जांच कितनी जल्दी पूरी होती है.