कश्मीर में केसर की फसल पर संकट, गर्मी से सूख रहे कॉर्म.. किसानों को भारी नुकसान का डर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Saffron Farming Kashmir: कश्मीर में केसर की खेती इस समय मौसम की मार झेल रही है. सितंबर से लगातार बने सूखे मौसम और अक्टूबर में सामान्य से ज्यादा तापमान ने घाटी के कई इलाकों में केसर की फसल को चिंता में डाल दिया है. खासकर पुलवामा और बडगाम के करेवा इलाकों में सैकड़ों हेक्टेयर में फैले केसर के खेतों में नमी की कमी देखने को मिल रही है. किसानों को डर है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो इस बार भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

कश्मीर घाटी में सितंबर से मौसम ज्यादातर सूखा रहा है. अक्टूबर की शुरुआत में भी तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया. श्रीनगर में 4 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो अक्टूबर महीने में 1935 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा तापमान बताया गया है. अक्टूबर को भी श्रीनगर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब 5.6 डिग्री ज्यादा था. लगातार गर्मी और बारिश की कमी का सीधा असर खेतों की मिट्टी की नमी पर पड़ रहा है.

केसर की खेती में इस समय जमीन के अंदर मौजूद कॉर्म यानी कंद बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इन्हीं से आगे पौधे की बढ़वार और फूल निकलते हैं. लेकिन लगातार गर्म मौसम और खेतों में नमी की कमी से किसानों को कॉर्म के सूखने की चिंता सता रही है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, पुलवामा के एक केसर किसान अली मोहम्मद ने अपनी फसल को बचाने के लिए खेत के बीच ही कुआं खुदवाया है. कुएं से पानी मिलने के बाद अब वह ड्रिप सिंचाई लगाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि जरूरत के हिसाब से खेत में नमी बनाए रखी जा सके.

अक्टूबर के महीने को केसर की खेती के लिए काफी अहम माना जाता है. इसी दौरान पौधे की बढ़वार और फूल आने की प्रक्रिया शुरू होती है. इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी रहना फसल के लिए जरूरी होता है. अगर लंबे समय तक खेत सूखे रहते हैं तो पौधों पर दबाव बढ़ सकता है और फूल आने पर भी असर पड़ सकता है. केसर किसान अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर सूखा मौसम कुछ और दिन जारी रहा तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है.

कश्मीर में केसर की खेती सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की कमाई का जरिया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस खेती से करीब 20,000 से 25,000 परिवार जुड़े हुए हैं. घाटी में आम तौर पर हर साल करीब 13 से 14 टन केसर का उत्पादन होता है. लेकिन पिछले कुछ सालों से मौसम में बदलाव, खेती की जमीन कम होने और उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों की परेशानी बढ़ी है. इसके साथ ही खेती की लागत भी बढ़ रही है, जबकि कई किसानों को पहले जैसी कमाई नहीं हो पा रही है.

केसर किसानों को इस बार भी कमजोर उत्पादन की चिंता सता रही है. अगर बारिश नहीं होती और गर्मी का असर आगे भी जारी रहता है, तो फसल की बढ़वार और फूल आने पर असर पड़ सकता है. किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि लगातार कमजोर उत्पादन के बीच बढ़ती लागत ने उनकी आर्थिक स्थिति पर पहले ही दबाव बना रखा है. ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश के साथ तापमान में कमी केसर की फसल के लिए बेहद अहम हो सकती है.

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