एग्रीवेट: Fish Farming Bengal: पश्चिम बंगाल में मछली पालन और मछली उत्पादन को और बढ़ाने की तैयारी है. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आगे की योजना पर काम करेंगी. 21 सितंबर 2026 को कोलकाता में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को लेकर एक बड़ी समीक्षा बैठक होने जा रही है. बैठक में मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ मछली पालकों को बेहतर बाजार, नई तकनीक और मजबूत सुविधाएं देने पर चर्चा होगी.
पश्चिम बंगाल देश के बड़े मछली उत्पादक राज्यों में शामिल है. वर्ष 2025-26 में राज्य में 25.43 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ. अलग-अलग सरकारी योजनाओं के तहत मत्स्य क्षेत्र में करीब 617 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. इस रकम से उत्पादन की तकनीक, मछली को सुरक्षित रखने की सुविधाएं, प्रोसेसिंग और लोगों की ट्रेनिंग जैसे कामों को बढ़ावा मिला है.
बैठक में सिर्फ मछली का उत्पादन बढ़ाने की बात नहीं होगी, बल्कि मछली पालकों को अपनी उपज का बेहतर दाम दिलाने पर भी चर्चा होगी. इसके लिए उत्पादन से लेकर मछली को बाजार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा. मछली की पैदावार बढ़ने के बाद उसे सही तरीके से रखना और समय पर बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है. इसलिए कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर भी बात होगी. सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे मछली पालकों को बाजार से सीधे और बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके.
मत्स्य पालन में नई तकनीक के इस्तेमाल को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है. बैठक में जलीय कृषि का दायरा बढ़ाने, उत्पादन की नई तकनीक अपनाने और इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने पर चर्चा होगी. इसके साथ ही सरकारी संस्थाओं, रिसर्च संस्थानों और वित्तीय संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर रहेगा. इससे मछली पालकों तक नई जानकारी, तकनीकी मदद और निवेश से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है.
केंद्र सरकार ने देश में 34 मत्स्य उत्पादन और प्रोसेसिंग क्लस्टर बनाए हैं. इनमें पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में ड्राई फिश यानी सूखी मछली का क्लस्टर भी शामिल है. इन क्लस्टरों के जरिए एक ही जगह पर मछली का उत्पादन, प्रोसेसिंग और उससे जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए मौके बन सकते हैं. सरकार मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों यानी एफएफपीओ और मछली पालन से जुड़ी सहकारी समितियों को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है.
बैठक में पश्चिम बंगाल में एकीकृत जलाशय विकास के लिए प्रशासनिक मंजूरी भी सौंपी जाएगी. इसका मकसद जलाशयों में मौजूद मछली पालन की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल करना है. राज्य में तालाबों, जलाशयों और दूसरे जल स्रोतों के जरिए मछली पालन को बढ़ाने की काफी गुंजाइश है. ऐसे में जलाशयों के बेहतर इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ाने के साथ स्थानीय लोगों के लिए कमाई के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के मत्स्य क्षेत्र से 30 लाख से ज्यादा मछुआरों और इससे जुड़े लोगों को आजीविका का सहारा मिलता है. ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश और सुविधाओं का विस्तार सीधे बड़ी आबादी से जुड़ा है. बैठक में सजावटी मछली पालन, फसल कटाई के बाद मछली को सुरक्षित रखने की सुविधाएं, बाजार से जुड़ाव और टिकाऊ मछली पालन जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाएगा.