एग्रीवेट: 22 सितंबर 2026, नई दिल्ली: ICAR-CMFRI ने बनाया ‘मत्स्यमेट्री’ ऐप, बिना छुए मछली की लंबाई-चौड़ाई मापेगा स्मार्टफोन – भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) ने ‘मत्स्यमेट्री’ नाम से एक स्मार्टफोन एप्लिकेशन विकसित किया है। इसकी मदद से मछलियों को भौतिक रूप से छुए बिना उनकी लंबाई और चौड़ाई मापी जा सकेगी। यह ऐप जलीय संसाधनों के स्वचालित मापन और मात्स्यिकी स्टॉक आकलन के लिए मानकीकृत लंबाई-आवृत्ति डेटा तैयार करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
‘मत्स्यमेट्री’ एक छवि आधारित मापन उपकरण का उपयोग करता है। इसके जरिए उपयोगकर्ता मछली की तस्वीर लेकर उसके आयामों का अनुमान लगा सकते हैं। माप अपने आप दर्ज होते हैं और लंबाई-आवृत्ति डेटासेट में संकलित किए जाते हैं। यह डेटा मात्स्यिकी आबादी के विश्लेषण, स्टॉक आकलन और संसाधन निगरानी में मदद कर सकता है। ICAR-CMFRI के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज के अनुसार, ऐप माप को स्वचालित रूप से दर्ज कर लंबाई-आवृत्ति डेटासेट तैयार करता है। इसे मात्स्यिकी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और क्षेत्रीय सर्वेक्षण दलों के लिए तैयार किया गया है, ताकि जैविक डेटा का तेजी से और व्यवस्थित तरीके से संग्रह किया जा सके।
एप्लिकेशन की मदद से एक ही मछली प्रजाति या जलीय संसाधन के कई जीवों का एक सैंपलिंग सत्र में मापन किया जा सकता है। मापन पूरा होने के बाद यह प्रणाली उपयुक्त वर्ग-अंतराल के आधार पर अपने आप लंबाई-आवृत्ति वितरण तैयार करती है। दर्ज किए गए माप संबंधित तस्वीरों के साथ सैंपलिंग सत्र में सुरक्षित किए जा सकते हैं। इसके बाद इन्हें आगे के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए सीसीवी फाइल के रूप में निर्यात किया जा सकता है।
‘मत्स्यमेट्री’ को ARCore-समर्थित एंड्रॉइड उपकरणों के लिए डिजाइन किया गया है। पंजीकरण और लॉगिन के बाद उपयोगकर्ता एक सैंपलिंग सत्र बना सकते हैं। इसके बाद स्मार्टफोन के कैमरे को समतल सतह की ओर करके मछली को कैमरे के दृश्य में रखना होगा। ऐप सतह का पता लगाता है और मछली की लंबाई व चौड़ाई का अनुमान लगाने के लिए स्क्रीन पर मापन गाइड उपलब्ध कराता है।
एप्लिकेशन को ICAR-CMFRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ICAR राष्ट्रीय फेलो ने विकसित किया है। उनके अनुसार, ‘मत्स्यमेट्री’ का उद्देश्य क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के दौरान जैविक डेटा संग्रह को आसान बनाना और वैज्ञानिक आकलन तथा संसाधन निगरानी के लिए मात्स्यिकी डेटा का व्यवस्थित उत्पादन करना है। इस परियोजना को भारत सरकार के कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ICAR-राष्ट्रीय फेलो परियोजना के माध्यम से समर्थन दिया गया है।