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एग्रीवोल्टाइक तकनीक से एक ही जमीन पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन का अवसर, किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने पर जोर
23 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: अब अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेंगे किसान, खेतों में फसल के साथ पैदा होगी बिजली – देश में किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने के लिए एग्रीवोल्टाइक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इस तकनीक के जरिए किसान एक ही खेत में फसल उगाने के साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकते हैं। इससे खेती के साथ बिजली उत्पादन को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए इस तकनीक को किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का नया अवसर बताया। इस व्यवस्था में खेत के ऊपर उपयुक्त ऊंचाई पर सौर पैनल लगाए जाते हैं, जबकि उनके नीचे उपलब्ध स्थान पर फसलों की खेती की जाती है।
एक ही खेत से अनाज और बिजली उत्पादन
एग्रीवोल्टाइक खेती में कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ जोड़ा जाता है। इसमें सौर पैनलों की ऊंचाई, उनके बीच की दूरी और खेत में पहुंचने वाली धूप का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि फसलों की वृद्धि प्रभावित न हो। फसल और स्थानीय जलवायु के अनुसार पैनलों की व्यवस्था तय करना जरूरी होता है। इस तकनीक से किसानों को अपनी जमीन से खाद्यान्न उत्पादन जारी रखने के साथ बिजली बनाने का अवसर मिल सकता है। उत्पादित बिजली का उपयोग सिंचाई पंपों और कृषि संबंधी अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकता है। अतिरिक्त बिजली की बिक्री से आय प्राप्त करने की संभावना भी संबंधित बिजली खरीद व्यवस्था और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
छोटे किसानों को ध्यान में रखकर बनेगी नीति
सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक नीति तैयार करते समय देश के छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से इस तकनीक पर अनुसंधान तथा किसानों के लिए उपयुक्त मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार की योजना के तहत प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के अगले चरण में भी एग्रीवोल्टाइक तकनीक को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए मिलने वाली सहायता और उसकी शर्तों की जानकारी संबंधित योजना के अंतिम दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी।
एग्रीवोल्टाइक तकनीक को सफल बनाने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि सौर पैनलों के कारण फसलों को पर्याप्त धूप मिलती रहे। इसके लिए फसल के प्रकार, मिट्टी, मौसम, पैनलों की ऊंचाई और स्थापना लागत का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। सही मॉडल अपनाने पर यह तकनीक कृषि भूमि से खाद्यान्न उत्पादन बनाए रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद कर सकती है।
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