एग्रीवेट: 19 सितंबर 2026, नई दिल्ली: ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: ICAR-ICRISAT साझेदारी के 50 साल पूरे, सूखे इलाकों में मजबूत खेती पर जोर – ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 के दूसरे दिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के बीच सहयोग के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया। इस मौके पर दोनों संस्थानों के पूर्व और मौजूदा प्रमुख एक साथ आए और पांच दशकों की साझेदारी की उपलब्धियों पर चर्चा की। साथ ही, ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में खेती में बदलाव को तेज करने और भविष्य में सहयोग को मजबूत करने के लिए रोडमैप पर मंथन हुआ।
विशेष सत्र की सह-अध्यक्षता ICAR के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. एस. पारोदा और ICRISAT के पूर्व महानिदेशक डॉ. विलियम डी. डार ने की। इस दौरान DARE के पूर्व सचिव और ICAR के पूर्व महानिदेशक डॉ. पंजाब सिंह, ICRISAT के पूर्व उप-महानिदेशक डॉ. सी. एल. एल. गौड़ा, ICAR के पूर्व उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. टी. आर. शर्मा और डॉ. स्वप्न दत्ता ने भी इस साझेदारी के विकास और उपलब्धियों पर अपने विचार रखे।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने साझेदारी को लेकर रणनीतिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने खेती से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए ICAR और ICRISAT की एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
आगे की रणनीति पर चर्चा के दौरान ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव और ICRISAT के ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम डायरेक्टर (एक्सेलेरेटेड क्रॉप इम्प्रूवमेंट) डॉ. रमन बाबू ने ICAR-ICRISAT सहयोग को मजबूत करने का रोडमैप पेश किया। इसमें वैज्ञानिक क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने और शोध के व्यापक प्रभाव पर जोर दिया गया। ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि ICAR और ICRISAT के सहयोग से वैज्ञानिक शोध का ठोस असर देखने को मिला है। उन्होंने आगे भारत और दूसरे देशों के सूखे इलाकों में बदलाव को तेज करने के लिए नवाचार, साउथ-साउथ सहयोग और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने पर जोर दिया।
कांग्रेस के दूसरे दिन तीन प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चाएं हुईं। इनमें सूखे इलाकों में मजबूत खेती के तरीकों को नए सिरे से तैयार करना, ग्लोबल साउथ में बीज प्रणालियों में बदलाव और जेंडर एवं युवाओं पर केंद्रित बदलाव शामिल रहे। इन चर्चाओं में छोटे किसानों के लिए एकीकृत और जलवायु-अनुकूल तरीकों, एशिया और अफ्रीका में बीज वितरण प्रणालियों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने पर विचार किया गया। इसके साथ ही सूखी जमीन पर खेती और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए समावेशी नीतियों और नेतृत्व पर भी चर्चा हुई।
तकनीकी सत्रों में मुश्किल परिस्थितियों में भी सफल रहने वाली सूखी जमीन की खेती की तकनीकों, ग्लोबल साउथ में बीज प्रणालियों और जेंडर व युवाओं पर केंद्रित बदलावों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कांग्रेस के तहत पोस्टर प्रेजेंटेशन भी शुरू हुए। इसमें छात्रों और शोधार्थियों ने अपने वैज्ञानिक शोध को प्रस्तुत किया। ‘सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार’ के लिए 10 और 11 सितंबर को 145 से ज्यादा पोस्टर्स का मूल्यांकन किया जा रहा है। इससे युवा शोधार्थियों को अपना काम देश-विदेश के विशेषज्ञों के सामने रखने और उनसे बातचीत करने का अवसर मिल रहा है।
दिन की एक प्रमुख चर्चा डॉ. आर. एस. पारोदा की ‘सूखे इलाकों में लचीलापन बढ़ाने के लिए कृषि-जैवविविधता’ विषय पर रही। उन्होंने सूखे इलाकों में खेती की व्यवस्था को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए कृषि जैवविविधता के संरक्षण और उसके सही इस्तेमाल के महत्व पर जोर दिया। डॉ. पारोदा ने कहा कि ICAR-ICRISAT साझेदारी के 50 साल पूरे होना उपलब्धियों को देखने के साथ भविष्य की दिशा तय करने का भी अवसर है। उनके अनुसार संसाधनों, विशेषज्ञता और विजन को साथ लाकर शुष्क भूमि की खेती में बदलाव की गति बढ़ाई जा सकती है।
डॉ. पंजाब सिंह ने पिछले पांच दशकों में ICAR-ICRISAT साझेदारी से मिले अहम नतीजों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगे सफल मॉडलों को बड़े स्तर पर लागू करने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि नई खोजें ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचें। डॉ. विलियम डी. डार ने कहा कि शुष्क भूमि कृषि का भविष्य मजबूत साझेदारी, नवाचार और वैज्ञानिक क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। इसमें किसानों की आय, पोषण सुरक्षा और कृषक समुदायों की मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
ICRISAT बोर्ड के सदस्य प्रोफेसर याये गसामा ने सूखे क्षेत्रों के लिए समाधान तैयार करने में महिलाओं और युवाओं की अधिक भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने नेतृत्व, नवाचार और उद्यम के जरिए उनकी भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. ए. वी. भवानी शंकर ने ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर के हस्तक्षेप से आगे बढ़कर नवाचारों को सिस्टम और बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 का दूसरा दिन संस्थागत साझेदारी मजबूत करने, वैज्ञानिक नवाचार को गति देने, मजबूत खेती और बीज प्रणालियां विकसित करने तथा सूखी जमीन की कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित रहा। कांग्रेस में आगे भी सूखे इलाकों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और साझेदारी को बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने पर चर्चा जारी रहेगी।
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