एग्रीवेट: UP Fasal Bima: उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा कराने वाले 6,18,327 किसानों ने अपनी फसल को नुकसान पहुंचने की सूचना दी है. इसके बाद कृषि विभाग और बीमा कंपनियों ने नुकसान की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब सबसे अहम काम यह पता लगाना है कि किन किसानों की फसल को कितना नुकसान हुआ है और कौन मुआवजे के लिए पात्र है. बुंदेलखंड के ललितपुर, महोबा और झांसी में सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं.
कृषि विभाग के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में उत्तर प्रदेश के करीब 23.36 लाख किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था. इनमें से 6.18 लाख से ज्यादा किसानों ने बारिश और तेज हवा से फसल खराब होने की सूचना दी है. यानी बीमा कराने वाले किसानों में 26 फीसदी से ज्यादा ने नुकसान की शिकायत की है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (सांख्यिकी) प्रमोद कुमार ने बताया कि, किसानों ने टोल-फ्री नंबर, पोर्टल के चैटबॉट और दूसरे माध्यमों से अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं. विभाग का कहना है कि अब इन शिकायतों की जांच कर पात्र किसानों को योजना के नियमों के मुताबिक मुआवजा दिलाने की कोशिश की जा रही है.
बुंदेलखंड के ललितपुर, महोबा और झांसी जिलों में सबसे ज्यादा किसानों ने फसल खराब होने की सूचना दी है. बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. हालांकि, किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा, यह जांच के बाद ही तय होगा. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को नुकसान की जानकारी घटना के 72 घंटे के भीतर संबंधित माध्यमों से देनी होती है. कुछ स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद खेत या खलिहान में रखी फसल को नुकसान होने की स्थिति में भी योजना के तय नियमों के अनुसार मदद मिल सकती है.
फसल नुकसान की शिकायत मिलने के बाद संबंधित मामले की जांच की जाती है. इसमें राज्य सरकार के अधिकारी और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि मिलकर नुकसान का आकलन करते हैं. जांच में यह देखा जाता है कि फसल को कितना नुकसान हुआ है और किसान योजना के तहत मुआवजा पाने की शर्तें पूरी करता है या नहीं. जानकारी के मुताबिक, पात्र दावे की 25 फीसदी रकम शुरुआती राहत के तौर पर जारी की जाती है. बाकी रकम तय प्रक्रिया के तहत नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद दी जाती है. इसलिए केवल शिकायत दर्ज कराने से मुआवजे की पूरी रकम मिलना तय नहीं होता.
जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा नहीं कराया है, वे भी कुछ शर्तों के आधार पर सरकारी राहत पाने के पात्र हो सकते हैं. ऐसे मामलों में राजस्व विभाग के जरिए आपदा राहत के नियमों के तहत नुकसान का आकलन किया जाता है. तय नियमों के मुताबिक, फसल को 33 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान होने पर कृषि सहायता दी जा सकती है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद खेतों में नुकसान का सर्वे किया जा रहा है. कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी मिलकर नुकसान का आकलन कर रहे हैं. जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार केंद्र से भी राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के तहत सहायता मांग सकती है.
कृषि विभाग के अनुसार, साल 2025 में उत्तर प्रदेश में बीमा कंपनियों ने किसानों के दावों के तहत 812 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि किसानों की ओर से प्रीमियम के रूप में 163 करोड़ रुपये जमा किए गए थे. इस बार भी नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन मुआवजे की रकम और भुगतान का फैसला जांच तथा योजना के नियमों के आधार पर होगा. किसानों के लिए जरूरी है कि वे नुकसान की सूचना समय पर दें और शिकायत से जुड़ी जानकारी व जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें.