कूनूर चाय नीलामी में तेजी, 95 फीसदी चाय बिकी.. बारिश की कमी से उत्पादन पर मंडरा रहा खतरा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Coonoor Tea कीमत: दक्षिण भारत के प्रमुख चाय बाजार कूनूर में इस सप्ताह चाय की नीलामी में अच्छी हलचल देखने को मिली. ब्लेंडर्स और निर्यातकों की मजबूत मांग के चलते नीलामी में उपलब्ध चाय का करीब 95 फीसदी हिस्सा बिक गया. खासकर अच्छी और मध्यम क्वालिटी की चाय को खरीदारों का अच्छा समर्थन मिला और कई किस्मों के दाम भी बढ़े. हालांकि, बाजार में तेजी के बीच चाय कारोबारियों की चिंता भी बढ़ रही है. कूनूर और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश की कमी के कारण पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले महीनों में चाय की नई पत्तियों और कुल उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स के आंकड़ों के मुताबिक, इस सप्ताह नीलामी में 12,78,366 किलो लीफ चाय बिक्री के लिए रखी गई थी. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से करीब 95 फीसदी चाय बिक गई. इसी तरह 3,06,770 किलो डस्ट चाय नीलामी में पेश की गई और इसका भी करीब 95 फीसदी हिस्सा खरीदारों ने खरीद लिया. इससे साफ है कि फिलहाल बाजार में चाय की मांग मजबूत बनी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, CTC लीफ चाय में इस सप्ताह मिलाजुला कारोबार देखने को मिला. ऊंची कीमत वाली कुछ किस्मों के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई. वहीं बेहतर क्वालिटी वाली कुछ चाय 3 से 4 रुपये प्रति किलो महंगी बिकी. मध्यम क्वालिटी की चाय को भी खरीदारों का अच्छा समर्थन मिला और इसके दाम 3 से 4 रुपये प्रति किलो तक बढ़े. सामान्य और कम क्वालिटी वाली चाय की कीमतों में भी 2 से 3 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई. यानी कुल मिलाकर CTC चाय की मांग मजबूत रही और बाजार में कारोबारियों को अच्छा समर्थन मिला.

होल लीफ चाय की मुख्य किस्मों के दाम ज्यादातर स्थिर रहे. हालांकि, कुछ किस्मों में 2 से 3 रुपये प्रति किलो की तेजी देखने को मिली. ब्रोकन चाय की मांग भी अच्छी रही और इसके दाम में करीब 2 से 3 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ. डस्ट चाय में भी खरीदारों की दिलचस्पी बनी रही. बेहतर क्वालिटी वाली ऑर्थोडॉक्स डस्ट चाय के दाम 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक बढ़े. कुछ अच्छी किस्मों में इससे भी ज्यादा तेजी रही. वहीं सेकेंडरी और बारीक डस्ट चाय के भाव में 2 से 3 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

फिलहाल चाय की मांग और नीलामी में कारोबार मजबूत है, लेकिन कारोबारियों के लिए बारिश की कमी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. कूनूर और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में जलाशयों और पानी के स्तर में कमी आने लगी है. चाय की नई पत्तियों की अच्छी बढ़वार के लिए पर्याप्त नमी जरूरी होती है. ऐसे में अगर उत्तर-पूर्वी मॉनसून से अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले महीनों में चाय की पत्तियों की बढ़वार धीमी हो सकती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

इसका असर केवल चाय पर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में उगाई जाने वाली दूसरी कृषि फसलों पर भी पड़ सकता है. अब कारोबारियों और चाय उत्पादकों की नजर उत्तर-पूर्वी मॉनसून की बारिश पर टिकी है. फिलहाल अच्छी मांग से बाजार को सहारा मिला है, लेकिन आगे उत्पादन बनाए रखने के लिए पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी मानी जा रही है.

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