एग्रीवेट: महाराष्ट्र के नासिक जिले में इस सीजन खरीफ प्याज की खेती करीब 34 फीसदी घट गई है. इससे प्याज के उत्पादन में कमी और आने वाले हफ्तों में सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है. राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल नासिक में 21,243 हेक्टेयर में खरीफ प्याज की खेती हुई है. जबकि जिले में इसका औसत रकबा 32,491 हेक्टेयर रहा है. कृषि अधिकारियों के अनुसार, मॉनसून की देरी और बुवाई के अहम समय में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों ने प्याज की खेती कम की. इसके चलते आने वाले समय में बाजार में प्याज की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक जिले में खरीफ प्याज की बुवाई आमतौर पर जुलाई की शुरुआत से सितंबर के मध्य तक होती है. इस साल मॉनसून करीब एक महीने की देरी से पहुंचा. इसके बाद अगस्त और सितंबर में भी बारिश का वितरण असमान रहा. इससे प्याज की बुवाई प्रभावित हुई. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई में बारिश पर्याप्त हुई थी, लेकिन अगस्त और सितंबर में लंबे समय तक बारिश नहीं हुई. कई इलाकों में जरूरत के मुताबिक बारिश भी नहीं हुई. इसका सीधा असर प्याज की बुवाई पर पड़ा और खेती का रकबा काफी घट गया.
नासिक में खरीफ प्याज का रकबा घटने के साथ-साथ पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस सीजन प्याज की उपज करीब 30 फीसदी तक घट सकती है.आमतौर पर खरीफ प्याज की औसत पैदावार 15 टन प्रति हेक्टेयर रहती है. लेकिन इस साल बारिश की कमी और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह घटकर 10-11 टन प्रति हेक्टेयर रह सकती है. अधिकारियों के अनुसार, मिट्टी में नमी की कमी का फसल पर सीधा असर पड़ा है. इससे प्याज की कुल पैदावार में बड़ी गिरावट आने की संभावना है.
नासिक में खरीफ प्याज की बुवाई में देरी का असर अब कटाई पर भी पड़ रहा है. आमतौर पर खरीफ प्याज की नई फसल अक्टूबर के मध्य तक थोक बाजारों में पहुंचने लगती है. लेकिन इस साल कटाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है. बाजार में प्याज की नियमित आवक दिसंबर के मध्य तक शुरू हो सकती है. कटाई में देरी से आने वाले दिनों में बाजार में प्याज की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. खरीफ प्याज को ज्यादा समय तक स्टोर भी नहीं किया जा सकता. इसकी भंडारण क्षमता एक महीने से भी कम होती है. इसलिए किसान कटाई के बाद जल्द ही प्याज बेचने को मजबूर होते हैं.
वहीं, गर्मियों में तैयार होने वाले प्याज की कटाई मार्च-अप्रैल में होती है. इसे 6-7 महीने तक स्टोर किया जा सकता है. इससे किसान बाजार के भाव को देखते हुए धीरे-धीरे अपनी फसल बेच सकते हैं. मई से अक्टूबर के मध्य तक बाजार में प्याज की मांग मुख्य रूप से भंडारित गर्मियों के प्याज से पूरी होती है. लेकिन अब इसका स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है. वहीं, खरीफ प्याज की नई फसल की आवक भी करीब एक महीने पीछे चल रही है.
कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक प्याज की कमी हो सकती है. अगर इस दौरान बाजार में प्याज की सप्लाई नहीं बढ़ी तो थोक कीमतों में और तेजी आ सकती है. अधिकारी ने बताया कि गर्मियों के प्याज का बचा हुआ स्टॉक लगातार घट रहा है, जबकि नई खरीफ फसल की आवक अभी शुरू नहीं हुई है. ऐसे में अगले एक महीने के दौरान बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ सकता है.