एग्रीवेट: Drought 2026: दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की भारी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में अब सूखा घोषित करने और किसानों को आर्थिक मदद देने की मांग तेज हो गई है. कम बारिश का असर सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आमदनी पर भी पड़ रहा है. खास बात यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी भी शुरू हो चुकी है, ऐसे में अब बारिश की कमी को पूरा करने का समय तेजी से कम होता जा रहा है.
दक्षिण भारत में बारिश की कमी सबसे ज्यादा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 20 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत कम रही. दक्षिणी प्रायद्वीप में यह कमी 28 प्रतिशत तक पहुंच गई. वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 9 प्रतिशत और मध्य भारत में 5 प्रतिशत बारिश कम हुई. सूखा निगरानी पोर्टल के आंकड़ों में महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई हिस्से बारिश की कमी से प्रभावित बताए गए हैं.
इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है. किसानों को अब फसल उत्पादन घटने के साथ कर्ज और रोजमर्रा के खर्च की चिंता भी सताने लगी है. 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून की वापसी भी शुरू हो गई है. ऐसे में किसान संगठनों और राजनीतिक दलों की मांग है कि राहत देने के लिए औपचारिक सूखा घोषित होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए.
आंध्र प्रदेश में 7.5 लाख रुपये तक मुआवजे की मांग
आंध्र प्रदेश में CPI(M) ने सूखा प्रभावित मंडलों की तत्काल घोषणा करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि किसानों, पट्टेदार किसानों और कृषि मजदूरों को विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए. पार्टी के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव के मुताबिक, करीब 50 लाख एकड़ में फसल बोई गई है, लेकिन 20 लाख एकड़ में भी पर्याप्त उत्पादन मिलने की संभावना नहीं है. पार्टी ने कर्ज माफी, मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार और सूखे से प्रभावित प्रत्येक पट्टेदार किसान परिवार को 7.5 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी है. पशुओं के लिए चारा केंद्र बनाने की मांग भी की गई है.
कर्नाटक में किसान संगठन ने दी प्रदर्शन की चेतावनी
कर्नाटक में कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) ने सूखे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की बात कही है. संगठन ने कहा है कि अगर विधानसभा के विशेष सत्र में किसानों के लिए ठोस राहत का रास्ता नहीं निकला, तो 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे. संगठन ने किसानों की कर्ज माफी, बैंकों की कर्ज वसूली रोकने और फसल नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने की मांग की है. साथ ही कृषि पंप सेट के लिए कम से कम सात घंटे बिजली, तालाबों और झीलों को भरने तथा फसल बीमा का पूरा मुआवजा किसानों के खातों में पहुंचाने की मांग भी उठाई गई है.
महाराष्ट्र में 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मदद की मांग
महाराष्ट्र में पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बारिश की कमी वाले इलाकों में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की है. उन्होंने प्रभावित किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और कृषि मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की. अकोला में भी किसानों ने सोयाबीन की फसल खराब होने का मुद्दा उठाते हुए सूखा घोषित करने की मांग की. कुछ किसानों ने कृषि मंत्री को सोयाबीन के पौधे सौंपकर बारिश की कमी से हुए नुकसान की ओर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की.
किसानों को अब राहत का इंतजार
दक्षिण भारत में बारिश की कमी और मॉनसून की वापसी के बीच किसानों की मांग अब तत्काल राहत पर केंद्रित है. अलग-अलग राज्यों में कर्ज, बिजली, रोजगार, चारा और फसल मुआवजे से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में सरकारों की ओर से राहत पैकेज और सूखा प्रभावित इलाकों को लेकर लिए जाने वाले फैसलों पर किसानों की नजर रहेगी.