एग्रीवेट: Brimato farming: मध्य प्रदेश के रायसेन में किसानों को खेती में नई तकनीक अपनाने के लिए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया. कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में किसानों ने ब्रिमैटो और पोमैटो जैसी ग्राफ्टिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया. इन तकनीकों के जरिए एक ही पौधे से दो अलग-अलग सब्जियों का उत्पादन लिया जा सकता है. इसके अलावा आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, प्रो-ट्रे तकनीक, सॉइल सोलराइजेशन और पौधों को बीमारियों से बचाने के तरीकों की जानकारी भी किसानों को दी गई.
प्रशिक्षण के दौरान ब्रिमैटो तकनीक किसानों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रही. इसमें बैंगन के पौधे और टमाटर की टहनी की ग्राफ्टिंग करके ऐसा पौधा तैयार किया जाता है, जिस पर दोनों फसलों का उत्पादन लिया जा सकता है. प्रशिक्षण में बताया गया कि एक ब्रिमैटो पौधे से करीब 3 किलो बैंगन और 3.5 से 4 किलो टमाटर की उपज मिल सकती है. ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे कुछ मौसमीय परिस्थितियों और बीमारियों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सहनशील माने जाते हैं. इससे किसानों को सीमित क्षेत्र में अलग-अलग सब्जियों का उत्पादन लेने का विकल्प मिलता है.
किसानों को पोमैटो ग्राफ्टिंग तकनीक की जानकारी भी दी गई. इसमें आलू के पौधे के तने पर टमाटर की टहनी को ग्राफ्ट किया जाता है. इसके बाद एक ही पौधे के जमीन के नीचे आलू और ऊपर टमाटर का उत्पादन लिया जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि एक पोमैटो पौधे से करीब 1 से 1.5 किलो आलू और 3 से 4 किलो टमाटर की उपज प्राप्त हो सकती है. इस तकनीक का उद्देश्य एक ही स्थान पर दो फसलों का उत्पादन लेकर खेती की उत्पादकता बढ़ाने के विकल्प उपलब्ध कराना है.
कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी सहित विभिन्न कृषि संस्थानों के विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी. सिलवानी, बाड़ी, बेगमगंज और औबेदुल्लागंज विकासखंडों के प्रगतिशील किसानों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया. किसानों को आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, प्रो-ट्रे में पौध तैयार करने, उठी हुई क्यारियों पर नर्सरी लगाने और सॉइल सोलराइजेशन की जानकारी दी गई. नर्सरी में पौध गलन जैसी बीमारियों से बचाव और पौधों को शुरुआती अवस्था में सुरक्षित रखने के तरीके भी समझाए गए.
कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बदलते मौसम और खेती के बढ़ते जोखिम को देखते हुए किसानों से नई तकनीकों को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. फल, सब्जी, पशुपालन और हाईटेक नर्सरी जैसे विकल्पों को खेती से जोड़कर आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं. इससे मौसम की अनिश्चितताओं के बीच खेती को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है.