एग्रीवेट: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के बीच राज्य को कम पानी और कम संसाधनों में ज्यादा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना होगा. मुख्यमंत्री ने फसल विविधीकरण और जल संसाधनों के संरक्षण की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि खेती में पानी की बचत के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना जरूरी है. बदलती जलवायु को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों और तकनीकों की ओर बढ़ना होगा, जिनमें कम पानी की जरूरत हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि हरियाणा में ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत वैकल्पिक फसल उगाने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है.
हरियाणा सरकार किसानों को धान की जगह दूसरी फसल लेने और खेती में पानी की बचत करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत वैकल्पिक फसल उगाने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है. उन्होंने कहा कि अब तक इस योजना के तहत 1.59 लाख किसानों को 166.34 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. किसानों ने 2.34 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की जगह दूसरी फसल अपनाई है. सरकार ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को भी बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को 85 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती को सुरक्षित बनाने के लिए टिकाऊ कृषि, फसल विविधीकरण और पानी बचाने पर ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने यह बात चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार में दो दिवसीय रबी कृषि मेले का उद्घाटन करने के बाद किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कही. मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास हरियाणा की महत्वपूर्ण नकदी फसल है. सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के इलाकों में लाखों किसान परिवार इससे जुड़े हैं. उन्होंने कपास को ‘सफेद सोना’ बताते हुए कहा कि बदलते मौसम और कीटों के हमले को सहन करने वाली नई किस्मों और तकनीकों को विकसित करने की जरूरत है.
सैनी ने बताया कि किसानों को कीट प्रबंधन और कम लागत में कपास की खेती के बारे में जानकारी देने के लिए 257 किसान फील्ड स्कूल लगाए गए हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए 7,000 से ज्यादा किसानों को जागरूक किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भूजल बचाने के लिए फसल विविधीकरण जरूरी है. किसानों को धान और गेहूं पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय दलहन, तिलहन और दूसरी कम पानी वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पानी रहेगा, तभी खेती रहेगी, गांव रहेगा और जीवन भी रहेगा. बदलते मौसम और घटते जल संसाधनों को देखते हुए खेती में पानी का सही इस्तेमाल करना समय की जरूरत है.
सीएम सैनी ने कहा कि सरकार किसानों को प्रधानमंत्री-किसान योजना, फसल खरीद और फसल बीमा के जरिए भी आर्थिक मदद दे रही है. प्रधानमंत्री-किसान के तहत 23 किस्तों में किसानों को अब तक 7,881.60 करोड़ रुपये दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 12 खरीद सीजन में 12 लाख किसानों के खातों में फसल खरीद के 1.85 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए हैं.