एग्रीवेट: कर्नाटक में खरीफ सीजन के दौरान भीषण सूखे से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से 20,585.73 करोड़ रुपये की तत्काल आर्थिक मदद मांगी है. यह राशि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत देने की मांग की गई है. राज्य में सूखे के कारण 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं और कुल नुकसान 62,481.88 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्व ने छह पन्नों के पत्र में कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 के दौरान कर्नाटक में सामान्य 852 मिमी बारिश के मुकाबले सिर्फ 551 मिमी बारिश हुई. यानी राज्य में सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. उन्होंने कहा कि 1956 के बाद यह दूसरी सबसे कम बारिश है, जबकि 1901 के बाद से यह सातवीं सबसे कम बारिश दर्ज की गई है.
कर्नाटक में मॉनसून के दौरान कम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के मुताबिक, मॉनसून के 122 दिनों में से 79 दिन बारिश सामान्य से कम या बहुत कम हुई. इससे खेतों में खड़ी फसलों पर बुरा असर पड़ा है. सूखे के आकलन के लिए 2020 के सूखा प्रबंधन नियमों के आधार पर कर्नाटक के 226 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. इनमें पहले घोषित 177 तालुकों के अलावा 49 नए तालुक शामिल हैं. राज्य में 53.92 लाख हेक्टेयर में लगी सामान्य फसलों और 4.01 लाख हेक्टेयर में लगी बागवानी फसलों को नुकसान हुआ है. फसलों को 33 से 100 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है. इनमें से ज्यादातर प्रभावित फसलों में नुकसान 50 फीसदी से अधिक बताया गया है.
कर्नाटक में भीषण सूखे के कारण कई प्रमुख फसलों को भारी नुकसान हुआ है. राज्य सरकार के मुताबिक, मक्का की 11.82 लाख हेक्टेयर, तुअर की 10.12 लाख हेक्टेयर, कपास की 6.68 लाख हेक्टेयर, रागी की 5.56 लाख हेक्टेयर और गन्ने की 4.88 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है. इसके अलावा मूंग की 3.80 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन की 2.24 लाख हेक्टेयर और धान की 1.65 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. बागवानी फसलों में आम की 1.26 लाख हेक्टेयर, नारियल की 87 हजार हेक्टेयर और लाल मिर्च व सुपारी की 42-42 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है.
राज्य सरकार ने फसल नुकसान की भरपाई और किसानों को राहत देने के लिए केंद्र से आर्थिक मदद मांगी है. सरकार ने फसल नुकसान की भरपाई के लिए 6,128.70 करोड़ रुपये और 61.91 लाख छोटे व सीमांत किसानों को राहत देने के लिए 12,146.99 करोड़ रुपये की मांग की है. इस प्रस्ताव के तहत किसानों को 60 दिनों के लिए प्रतिदिन 327 रुपये के हिसाब से सहायता देने की मांग की गई है.
इसके अलावा, पेयजल आपूर्ति और जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 1,727 करोड़ रुपये मांगे गए हैं. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1,130 करोड़ और शहरी क्षेत्रों के लिए 597 करोड़ रुपये शामिल हैं. पशुपालन से जुड़ी राहत के लिए भी 583.04 करोड़ रुपये की मांग की गई है. इस राशि से 476 पशु शिविर, 583 चारा बैंक, पशुओं की दवाओं और चारे की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है.