एग्रीवेट: धनतेरस पर पहला दीपक घर के पूजा स्थान पर जलाएं. इसे अपने इष्ट देव को समर्पित किया जाता है. वहीं, दूसरा दीपक घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिशा पूजा-पाठ के लिए शुभ मानी जाती है. इन दोनों जगहों पर दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है.
तीसरा दीपक घर में लगे तुलसी के पौधे के पास और चौथा मुख्य दरवाजे पर जलाएं. हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है. वहीं, मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है और मां लक्ष्मी के स्वागत का भाव जुड़ा होता है.
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पांचवां दीपक घर की दक्षिण दिशा में रखें. इस दीपक को यमराज को समर्पित किया जाता है और इसे यम दीपम कहते हैं. इसके बाद छठा दीपक घर के बीच वाले हिस्से यानी ब्रह्मस्थान में जलाएं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दोनों जगहों पर दीपक जलाने से परिवार की सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है.
सातवां दीपक घर के शौचालय के बाहर जलाएं. आठवां दीपक बालकनी या छत पर रखें, जबकि नौवां दीपक स्टोर रूम या उस जगह के पास जलाएं, जहां पुराना सामान और कबाड़ रखा जाता है. मान्यता है कि धनतेरस पर घर के हर हिस्से में रोशनी करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक माहौल बना रहता है.
दसवां दीपक घर के पास किसी चौराहे पर और ग्यारहवां पीपल के पेड़ के नीचे जलाने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ को पवित्र माना गया है. इसके नीचे दीपक जलाने को पितरों का आशीर्वाद पाने से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, चौराहे पर दीपक रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि किसी राहगीर या वाहन को परेशानी न हो.
बारहवां दीपक घर में लगे बेल के पौधे के पास और तेरहवां दीपक खिड़की के पास जलाएं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, बेल के पौधे का संबंध भगवान शिव से माना जाता है. इस तरह धनतेरस की रात घर के इन 13 अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा पूरी होती है. माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है.