पंजाब में मूंगफली की फली बनने की अवस्था में टिक्का रोग का खतरा, जानें सही दवा और मात्रा—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 01 अक्टूबर2026, अमृतसर: पंजाब में मूंगफली की फली बनने की अवस्था में टिक्का रोग का खतरा, जानें सही दवा और मात्रा – पंजाब में मूंगफली की फसल फली बनने की अवस्था में पहुंच चुकी है और इसी दौरान कई इलाकों में टिक्का पत्ती धब्बा रोग (टिक्का लीफ स्पॉट) का असर देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की कृषि मौसम परामर्श सेवा (AMFU) ने अमृतसर और जालंधर जिलों के लिए 29 सितंबर 2026 को जारी अपने बुलेटिन में किसानों को समय रहते बचाव के उपाय करने की सलाह दी है।

इस रोग में पत्तियों की दोनों सतहों पर गोल से अनियमित आकार के भूरे धब्बे बन जाते हैं, जिनके चारों ओर पीला घेरा दिखाई देता है। ज्यादा संक्रमण होने पर पत्तियां सूखकर झड़ने लगती हैं, जिससे पौधे की भोजन बनाने की क्षमता घट जाती है और फली का विकास प्रभावित होता है।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक टिक्का रोग की शुरुआत अगस्त महीने से ही हो जाती है और बारिश व नमी वाले मौसम में यह तेजी से फैलता है। पंजाब में इस समय मूंगफली की फसल फली विकास की नाजुक अवस्था में है, इसलिए बीमारी का असर सीधे उत्पादन पर पड़ सकता है। बुलेटिन में सलाह दी गई है कि इस अवस्था में फसल को पानी की कमी न होने दी जाए, क्योंकि जल-तनाव रोग को और बढ़ा सकता है।

IMD-AMFU के बुलेटिन के अनुसार टिक्का रोग की रोकथाम के लिए दो विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प घुलनशील गंधक (वेटेबल सल्फर) है, जिसे 500 से 750 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 से 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़का जा सकता है।

दूसरा विकल्प कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील पाउडर (बाविस्टिन/डेरोसाल/एग्रोज़िम जैसे ब्रांड) है, जिसकी मात्रा 50 से 60 ग्राम प्रति एकड़, 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव के लिए तय की गई है। बुलेटिन में सलाह दी गई है कि अगस्त महीने से शुरू करते हुए 15 दिन के अंतराल पर तीन से चार छिड़काव किए जाएं, ताकि रोग को शुरुआत में ही काबू में रखा जा सके।

छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि दवा का घोल पत्तियों की दोनों सतहों पर अच्छी तरह पहुंचे, क्योंकि धब्बे अक्सर पत्ती के नीचे की सतह पर पहले दिखाई देते हैं। साथ ही छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर रहता है जब तेज धूप न हो। बुलेटिन में यह भी साफ किया गया है कि फली विकास की अवस्था में मूंगफली की फसल को नियमित हल्की सिंचाई की जरूरत होती है, क्योंकि पानी की कमी से पौधा कमजोर पड़ता है और रोग का हमला और बढ़ जाता है।

किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि छिड़काव से पहले खेत का निरीक्षण जरूर करें और सिर्फ उन्हीं पौधों या हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करें जहां धब्बे दिखना शुरू हुए हैं, ताकि शुरुआती अवस्था में ही रोग को फैलने से रोका जा सके। रोग की चपेट में आई पुरानी और ज्यादा प्रभावित पत्तियों को हटाकर नष्ट करने से भी संक्रमण फैलने की रफ्तार धीमी होती है। किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के अधिकारी से एक बार सलाह जरूर ले लें, क्योंकि मिट्टी और मौसम की स्थिति के हिसाब से मात्रा में हल्का बदलाव हो सकता है।

मूंगफली पंजाब की एक अहम तिलहन फसल है और फली बनने की अवस्था में टिक्का रोग का हमला सीधे उपज और तेल की गुणवत्ता पर असर डालता है। समय पर सही दवा और मात्रा का इस्तेमाल न सिर्फ किसानों की उपज बचाएगा, बल्कि गंधक और कवकनाशी दवाओं की मांग को देखते हुए यह स्थानीय कृषि-इनपुट कारोबार के लिए भी इस सीजन की एक अहम जानकारी है।

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