एग्रीवेट: पंजाब में धान की कटाई के बीच पराली जलाने के मामले बढ़ने लगे हैं. गुरुवार को 15 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में पराली जलाने की कुल घटनाओं की संख्या 103 हो गई. यह पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 95 मामलों से 8 ज्यादा है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के 7 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के तय मानकों के तहत राज्य में पराली जलाने की 103 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से 87 खेतों का मौके पर निरीक्षण किया जा चुका है, जबकि 37 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है.
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में अमृतसर सबसे आगे है. यहां अब तक 59 मामले सामने आए हैं. इसके बाद तरनतारन में 26 मामले दर्ज किए गए हैं. फिरोजपुर में 5, गुरदासपुर में 3, जबकि मोगा और पटियाला में 2-2 मामले सामने आए हैं. वहीं, फरीदकोट, फाजिल्का, होशियारपुर, एसबीएस नगर और एसएएस नगर में एक-एक घटना दर्ज की गई है. ज्यादातर मामले उन जिलों से सामने आए हैं, जहां कम समय में पकने वाली धान की किस्में उगाई गई हैं.
पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना अक्टूबर और नवंबर के दौरान दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने की एक वजह माना जाता है. धान की कटाई के बाद किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए कम समय मिलता है. ऐसे में कुछ किसान खेत जल्दी खाली करने के लिए पराली जला देते हैं. वहीं, अमृतसर में पराली जलाने के 59 मामले सामने आए हैं. इनमें से 50 खेतों का निरीक्षण किया जा चुका है और 18 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है. वहीं, तरनतारन में दर्ज 26 मामलों में से 20 खेतों की जांच की गई है. इनमें 11 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है.
अमृतसर में सबसे ज्यादा 85 हजार रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. इसमें से 60 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं. तरनतारन में 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 20 हजार रुपये की वसूली हुई है. वहीं, फिरोजपुर में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और अब तक 15 हजार रुपये वसूले गए हैं. प्रशासन की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.