हरियाणा में पराली जलाने के मामलों ने चौंकाया, जानिए पंजाब और मध्य प्रदेश में कितने केस—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: हरियाणा में धान की कटाई का सीजन रफ्तार पकड़ने के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी कमी देखने को मिली है. राज्य में 3 अक्टूबर तक खेतों में पराली जलाने के सिर्फ 4 मामले सामने आए हैं. पिछले साल इसी अवधि में 7 घटनाएं दर्ज की गई थीं. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की CREAMS लैब के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 218 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें सबसे ज्यादा 79 मामले पंजाब में सामने आए. वहीं, मध्य प्रदेश में 70 और उत्तर प्रदेश में 59 घटनाएं दर्ज की गईं. जबकि, हरियाणा और राजस्थान में 4-4 और दिल्ली-उत्तराखंड में 1-1 घटना सामने आई.

आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने की घटनाओं में करीब 50 फीसदी की कमी आई है. वहीं पंजाब में पिछले साल इसी अवधि में 97 घटनाएं दर्ज हुई थीं. हालांकि, हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में कमी की एक बड़ी वजह अब सिर्फ सरकारी सख्ती नहीं, बल्कि पराली का बढ़ता बाजार भी माना जा रहा है. अधिकारियों और किसानों के मुताबिक, पराली बेचकर कमाई का मौका मिलने से किसान इसे जलाने के बजाय खेत से हटाने में रुचि दिखा रहे हैं.

राज्य के कई इलाकों में निजी ऑपरेटर बेलर मशीनों की मदद से खेतों से पराली इकट्ठा कर रहे हैं. इसके बाद पराली को उन उद्योगों तक पहुंचाया जा रहा है, जहां इसका इस्तेमाल बायोमास ईंधन और कच्चे माल के तौर पर होता है. इस साल उन गांवों में भी पराली संग्रह का कारोबार शुरू हुआ है, जिन्हें पहले पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट के तौर पर देखा जाता था. ऑपरेटर ट्रैक्टर और बेलर मशीनों के जरिए रोजाना सैकड़ों एकड़ खेतों से पराली उठा रहे हैं. इसे बोतल बनाने, कार्डबोर्ड, डाई और दूसरे उद्योगों में भेजा जा रहा है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, सख्ती और किसानों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है. इसे और कम करने के लिए हरियाणा और पंजाब में 2018 के आदेशों को पूरी तरह लागू करना जरूरी है. इन आदेशों के तहत एसएमएस सिस्टम वाली कंबाइन हार्वेस्टर मशीनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया था.

ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह लाठर ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि किसानों को धान की पराली मिट्टी में मिलाने के लिए गहरी जुताई पर 2,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी दी जानी चाहिए. इससे मिट्टी की उर्वरता  बढ़ेगी और पराली के निपटारे का पर्यावरण अनुकूल समाधान मिलेगा. हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य के किसान अब तेजी से पराली जलाने से दूर हो रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह फसल अवशेष का बाजार तैयार होना है. सरकार किसानों को उद्योगों से जोड़ने के लिए सप्लाई चेन को भी मजबूत कर रही है. उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसानों के सहयोग से हरियाणा को पराली जलाने से मुक्त बनाने में मदद मिलेगी.

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