छत्तीसगढ़ में बारिश-बाढ़ ने मचाई तबाही, 4 हजार हेक्टेयर धान बर्बाद! किसानों के लिए राहत का ऐलान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Paddy Crop Damage: छत्तीसगढ़ के बस्तर में सितंबर के आखिरी दिनों में हुई तेज बारिश ने किसानों और ग्रामीण परिवारों की परेशानी बढ़ा दी. 23 से 26 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. लगभग 4 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल प्रभावित हुई है. वहीं 300 से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है.

बस्तर में इस समय कई जगह धान की फसल पकने की ओर बढ़ रही थी. ऐसे में अचानक आई बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. खेतों में पानी भरने और तेज बहाव के कारण धान की फसल गिर गई और कई जगह पानी में डूबी रही. लंबे समय तक पानी में रहने से तैयार होती फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है. इससे किसानों को पैदावार और आमदनी दोनों में नुकसान हो सकता है.

बाढ़ का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा. तेज पानी और बहाव के कारण कई कच्चे-पक्के मकानों को नुकसान पहुंचा है. कुछ इलाकों में मवेशियों के बहने की भी खबर सामने आई है. ग्रामीण परिवारों के लिए पशुधन आय का बड़ा सहारा होता है. ऐसे में मवेशियों के नुकसान से उनकी रोजमर्रा की कमाई पर भी असर पड़ सकता है. प्रभावित इलाकों में अब नुकसान का जायजा लेने का काम शुरू किया गया है.

बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. उन्होंने अधिकारियों को मकान, फसल और पशुधन के नुकसान का जल्द सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं. पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के दोबारा निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि गई है. इसके अलावा प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त मदद देने की बात कही गई है.

बाढ़ से हुए नुकसान को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र भेजकर विशेष राहत पैकेज की मांग की है. उन्होंने बर्बाद हुई खरीफ फसलों के लिए एनडीआरएफ मद से जल्द सहायता देने, बेघर परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत घर उपलब्ध कराने और बह गए मवेशियों व छोटे दुकानदारों के नुकसान का सर्वे कराने का आग्रह किया है. मुआवजे की रकम सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजने की मांग भी रखी गई है.

भविष्य में ऐसी स्थिति से नुकसान कम करने के लिए जोरा नाला की जल निकासी व्यवस्था पर नए सिरे से काम करने की मांग की गई है. इसके लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल रिसर्च के आधार पर संशोधित डीपीआर तैयार करने का सुझाव दिया गया है. इसके अलावा नदी किनारे पौधरोपण, पक्के तटबंध और जगदलपुर में एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बनाने की मांग भी की गई है. इंद्रावती नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ की स्थिति बनने से पहले लोगों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

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