योगी सरकार का निर्देश : घर-घर पहुंचे पशु चिकित्सक, पशुपालकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में पशुओं के टीकाकरण और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों की रोकथाम को लेकर योगी सरकार ने समीक्षा की है. समीक्षा के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पशुओं की चिकित्सा के लिए घर-घर पशु चिकित्सकों के पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. सरकार का जोर समय पर इलाज, टीकाकरण और पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने पर है. इसके साथ ही पशुपालकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके.

उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में राजकीय पशु चिकित्सालयों  के माध्यम से खुरपका-मुंहपका (FMD) और गोवंशीय पशुओं में होने वाली लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के खिलाफ निःशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं, ताकि बीमारी के खतरे को कम किया जा सके. टीकाकरण के साथ पशुओं के स्वास्थ्य पर नजर रखने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने पर भी जोर दिया गया है.

पशुपालकों को पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल तक ले जाने में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए मोबाइल वेटनरी यूनिट  की सुविधा भी संचालित की जा रही है. इसके जरिए जरूरत पड़ने पर पशुओं को उनके घर पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. पशुपालक इस सेवा के लिए टोल फ्री नंबर 1962 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा पशुओं से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए 18001805141 हेल्पलाइन नंबर पर भी सहायता ली जा सकती है.

खुरपका-मुंहपका और लम्पी जैसी बीमारियों से पशुओं को बचाने  के लिए समय पर टीकाकरण के साथ साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रबंधन भी जरूरी है. पशुपालकों को पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखने पर खुद से इलाज करने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है. घर तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने की व्यवस्था का उद्देश्य पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और बीमारी के फैलाव को रोकने में मदद करना है.

पशुपालन के साथ मत्स्य पालकों  को भी जरूरी सलाह दी गई है. उन्हें कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों के मत्स्य बीज का उचित समय पर संचय करने को कहा गया है. यह मत्स्य बीज उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों पर उपलब्ध है. वहीं, प्राकृतिक या आकस्मिक आपदा की स्थिति में किसान और पशुपालक राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम 1070 और जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम 1077 पर संपर्क कर सकते हैं. सरकार की इस व्यवस्था से पशुपालकों को बीमारी या आपात स्थिति में समय पर सहायता मिलने की उम्मीद है.

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