एग्रीवेट: Maharashtra Cow Fodder Crisis: महाराष्ट्र में सूखे के कारण खेतों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी चारे का संकट बढ़ने की आशंका है. ऐसे में राज्य सरकार ने किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. अब हर जिले में चारा बैंक बनाए जाएंगे, सूखे चारे की कीमत तय की जाएगी और पशुओं के लिए चलाए जाने वाले चारा शिविरों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी. सरकार ने इसके लिए हर जिले के सालाना बजट का कम से कम 5 फीसदी हिस्सा चारे से जुड़ी योजनाओं पर खर्च करने का निर्देश दिया है.
सरकार का मकसद है कि, सूखे के समय पशुओं को पर्याप्त चारा मिल सके और पशुपालकों को इसे खरीदने के लिए ज्यादा पैसे न खर्च करने पड़ें. इसके लिए पशुपालन विभाग ने नए नियमों और योजनाओं को लेकर आदेश जारी किया है.
महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के दौरान राज्य की 304 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की है. कम बारिश के कारण इन इलाकों में फसल उत्पादन के साथ पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने एक खास समूह बनाया था, जिसने चारे की कमी से निपटने के उपाय सुझाए. कैबिनेट की सूखा प्रबंधन समिति ने इन सुझावों को मंजूरी दे दी है. अब इन्हें जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है.
सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को अपने जिले में चारा बैंक बनाने का निर्देश दिया है. इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसान समूहों और सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जाएगी. किसान अपनी खाली पड़ी जमीन पर चारा उगा सकेंगे. कृषि विश्वविद्यालयों, सरकारी बीज केंद्रों और पशुपालन विभाग की जमीन पर भी चारे की खेती की जाएगी.
सरकार ने सूखे चारे की कीमत 12 रुपये प्रति किलो और साइलेज यानी हरे चारे को सुरक्षित रखने की खास विधि से तैयार चारे की कीमत 8 रुपये प्रति किलो तय की है. इसमें ढुलाई का खर्च शामिल नहीं होगा. सूखा चारा लंबे समय तक खराब नहीं होता, इसलिए इसकी खरीद को प्राथमिकता दी जाएगी.
सरकार किसानों को ऐसी चारा फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिनमें कम पानी लगता है और एक से ज्यादा बार कटाई की जा सकती है. रबी सीजन में चारे के बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को दी गई है. इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स और एजोला जैसे दूसरे तरीकों से भी पशुओं के लिए चारा तैयार करने को बढ़ावा दिया जाएगा. गन्ना मिलों को जरूरत के मुताबिक गन्ने की पत्तियां, खोई और शीरा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं. वन क्षेत्रों में मौजूद घास और चारे को काटकर सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर पशुपालकों को दिया जा सके.
सूखे के हालात में चारे का इस्तेमाल पशुओं को खिलाने के अलावा दूसरे कामों में नहीं किया जा सकेगा. यानी पैकिंग, बायोफ्यूल और बिजली बनाने जैसे कामों के लिए चारे का इस्तेमाल रोक दिया जाएगा. इसके साथ ही महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सीमावर्ती इलाकों से दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया है.
सरकार चारा शिविरों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक ऑनलाइन निगरानी सिस्टम तैयार करेगी. इसमें पशुओं की संख्या, रोजाना उपस्थिति, चारे की उपलब्धता, इलाज और खर्च का रिकॉर्ड रखा जाएगा. शिविरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड से हाजिरी भी जरूरी होगी. पशुओं की पहचान भारत पशुधन सिस्टम के जरिए की जाएगी. जिला स्तर पर अधिकारी इन शिविरों की निगरानी करेंगे. साथ ही कंपनियों से मिलने वाली सीएसआर मदद का इस्तेमाल चारा उत्पादन, पानी, उपकरण और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं पर भी किया जा सकेगा.