एग्रीवेट: देश में 1 अक्टूबर से नया चीनी सीजन शुरू हो गया है. इसी बीच केद्र सरकार ने घरेलू बाजार के लिए 14 लाख टन चीनी का कोटा तय कर दिया है. खास बात यह है कि यह कोटा 1 से 15 अक्टूबर के बीच बिक्री के लिए है. इसमें से 1 लाख टन चीनी का कोटा उन कंपनियों को दिया गया है जो सिर्फ चीनी को साफ करने का काम करती हैं. दरअसल, त्योहारों के इस सीजन में चीनी की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें, इसके लिए सरकार हर महीने या पखवाड़े (15 दिन) में चीनी बिक्री का कोटा तय करती है.
खाद्य मंत्रालय ने जारी अपने एक नए आदेश में चीनी मिलों के लिए पाक्षिक (15 दिवसीय) कोटे के तहत बिक्री के सख्त नियम लागू किए हैं. नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, मिलों के लिए आवंटित कोटे की कम से कम 45 प्रतिशत चीनी पहले हफ्ते में बेचना अनिवार्य होगा, जबकि शेष मात्रा अगले हफ्ते में बेची जा सकेगी. इसके साथ ही सरकार ने अक्टूबर में गन्ने की पेराई शुरू करने वाली मिलों को बड़ी राहत देते हुए यह प्रावधान किया है कि वे निर्धारित कोटे के अलावा अपनी उत्पादित अतिरिक्त चीनी को अक्टूबर और नवंबर के दौरान कभी भी बाजार में बेच सकेंगी.
देशभर में चीनी की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए कुल 13 लाख टन का कोटा आवंटित किया गया है, जिसमें से सबसे बड़ा 83 प्रतिशत हिस्सा (10.77 लाख टन) देश के शीर्ष तीन चीनी उत्पादक राज्यों को मिला है. राज्यवार आवंटन के तहत महाराष्ट्र की मिलों को 4.39 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.18 लाख टन और कर्नाटक को 2.20 लाख टन चीनी का कोटा सौंपा गया है, ताकि त्योहारों के इस मौसम में बाजार में आपूर्ति बनी रहे और कीमतें नियंत्रण में रहें.
20 अक्टूबर को मनाए जाने वाले दशहरा त्योहार से पहले खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से त्योहारों के दौरान चीनी के दाम काबू में रहेंगे. इस बार भी स्टैंडअलोन रिफाइनर्स कंपनियों को 1 लाख टन चीनी बेचने का कोटा आवंटित किया गया है, जो पिछले दो आवंटनों के ही समान है. अक्टूबर के पहले पखवाड़े (15 दिन) के लिए ‘श्री रेणुका शुगर्स’ और ‘श्री दत्त इंडिया’ को 50-50 हजार टन का कोटा मिला है, जैसा कि सितंबर के पहले पखवाड़े में दिया गया था. बता दें कि सरकार ने सितंबर के दूसरे पखवाड़े में रिफाइनर्स के इस 1 लाख टन के कोटे को 60:40 के अनुपात में विभाजित किया था.
इसके साथ ही सरकार ने चीनी मिलों के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है. मिलों को निर्देश दिया गया है कि बिक्री के बाद 7 दिनों के भीतर चीनी का उठान (डिस्पैच) होना अनिवार्य है. इस नियम के पालन की जांच के लिए ‘बिक्री’ का मतलब मिल द्वारा बिल (सेल इनवॉइस) जारी करने की तारीख से माना जाएगा. आदेश के अनुसार, जारी किए गए बिल में दर्ज चीनी की मात्रा को ही कुल बिक्री माना जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि चीनी सिर्फ कागजों पर न बिके बल्कि समय पर बाजार तक पहुंचे.
पिछले आदेश के विपरीत, खाद्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किए गए नए आदेश में अनबिके चीनी कोटे को निपटाने के संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किया गया है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के इस मौन रुख का उद्देश्य चीनी मिलों को पिछले बचे हुए कोटे को अक्टूबर महीने में बेचने की अनुमति देना है, ताकि त्योहारों के सीजन में घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे.
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के पूरे चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए कुल कोटा 272 लाख टन तय किया गया था, जो कि 2024-25 सीजन के 275.5 लाख टन आवंटन से करीब 1.3 प्रतिशत कम है. हालांकि, भारत में चीनी की सालाना घरेलू खपत 285 से 290 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है, जिसके चलते सरकार बाजार में सप्लाई सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार ऐसे कदम उठा रही है. बता दें कि गुरुवार से चीनी का नया सीजन शुरू हो गया है. इसके साथ ही महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 अक्टूबर के आसपास से चीनी मिलें गन्ने की पेराई का काम शुरू करने की तैयारी कर रही हैं, जो कि सामान्य समय से थोड़ा पहले है.