एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश में इस बार 37 लाख टन धान खरीदेगी सरकार, राज्यभर में खुलेंगे 2,619 खरीद केंद्र -खरीफ फसल की कटाई शुरू होने से पहले ही आंध्र प्रदेश सरकार ने धान खरीद की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के नागरिक आपूर्ति विभाग ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए 37 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राज्यभर में 2,619 विशेष खरीद केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां करीब 24,000 कर्मचारियों की तैनाती होगी। यह जानकारी 26 सितंबर को सामने आई राज्य सरकार की तैयारियों से मिली है।
नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंदला मनोहर ने कहा कि हाल की बारिश और फसल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज्य में धान का उत्पादन अनुमान से भी ज्यादा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खरीद की तैयारियों का दायरा पहले से बढ़ा दिया है, ताकि किसी भी किसान को उपज बेचने में परेशानी न हो।
सरकार ने खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए 31,000 जीपीएस-सुसज्जित वाहनों की व्यवस्था की है, जिनसे धान की ढुलाई पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा धान भरने के लिए 6.10 करोड़ जूट के बोरों का इंतजाम किया गया है। किसानों की शिकायतों के तुरंत निपटारे के लिए राज्य स्तर पर एक शिकायत प्रकोष्ठ बनाया गया है, वहीं हर जिले में अलग से हेल्प सेंटर भी खोले जा रहे हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार खरीद केंद्रों की संख्या और कर्मचारियों की तैनाती दोनों में बढ़ोतरी की गई है। इससे उम्मीद है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और भुगतान भी समय पर हो सकेगा।
आंध्र प्रदेश में पिछले खरीफ सीजन के दौरान कई बार किसानों ने खरीद केंद्रों पर देरी और भुगतान में विलंब की शिकायत की थी। इस बार सरकार ने पहले से ही बड़े पैमाने पर तैयारी करके इस चुनौती से निपटने का प्रयास किया है। हालांकि असली परीक्षा तब होगी जब कटाई के बाद बड़ी मात्रा में धान मंडियों तक पहुंचना शुरू होगा।
धान खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाती है, जिससे किसानों को खुले बाजार में होने वाले दाम के उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है। आमतौर पर खरीद केंद्रों पर धान की नमी और गुणवत्ता की जांच के बाद ही उपज खरीदी जाती है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी लेकर आएं, ताकि खरीद प्रक्रिया में देरी न हो।
राज्य सरकार ने इस बार खरीद केंद्रों की संख्या पिछले सीजन के मुकाबले बढ़ाई है और शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत किया है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी आसानी से अपनी उपज बेचने का मौका मिल सके। जिला स्तर पर बनाए गए हेल्प सेंटर किसानों को पंजीकरण, तौल और भुगतान से जुड़ी जानकारी और सहायता देंगे। कृषि विभाग का कहना है कि इससे खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम बनेगी।
धान कृषि-इनपुट कारोबार के लिहाज से भी आंध्र प्रदेश एक अहम राज्य माना जाता है, क्योंकि यहां खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ने से आसपास के इलाकों में परिवहन, तौल-कांटा और भंडारण से जुड़े छोटे कारोबारियों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।