एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, पटना: बिहार में किसानों को फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप पर मिलेगी 75 प्रतिशत तक सब्सिडी – कीटनाशकों पर होने वाले खर्च से परेशान बिहार के किसानों के लिए राज्य कृषि विभाग ने बड़ी राहत की योजना शुरू की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए “पौधा संरक्षण से संबंधित उपादान वितरण योजना” के तहत किसानों को फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप जैसे कीट नियंत्रण उपकरणों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया डीबीटी पोर्टल पर पहले ही शुरू हो चुकी है।
योजना के तहत फेरोमोन ट्रैप के एक सेट पर 96 से 177 रुपये, स्टिकी ट्रैप पर 30 रुपये प्रति सेट और फ्रूट फ्लाई ट्रैप पर 153 से 165 रुपये प्रति सेट तक की सब्सिडी दी जा रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की अगुवाई में विभाग ने यह योजना खासतौर पर उन किसानों के लिए तैयार की है, जो महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
यह योजना धान, मक्का, टमाटर, बैंगन, अन्य सब्जियों और अमरूद जैसी फलदार फसलों के किसानों के लिए बनाई गई है। सामान्य क्षेत्रों में एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक के रकबे के लिए यह अनुदान ले सकता है। वहीं पटना, नालंदा, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और मुंगेर जैसे टाल क्षेत्रों के किसानों को 10 एकड़ तक की सीमा में यह सुविधा दी गई है, क्योंकि इन इलाकों में खेती का रकबा अपेक्षाकृत बड़ा होता है।
फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप कीटों को आकर्षित कर पकड़ने वाले सरल उपकरण हैं, जिनसे बिना रसायन छिड़के भी कीटों की संख्या पर नजर रखी जा सकती है और उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। कृषि विभाग का मानना है कि इनके इस्तेमाल से कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होगा और साथ ही मिट्टी व फसल की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए बिहार सरकार के कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद पात्रता की जांच होती है और स्वीकृति मिलने पर अनुदान राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नजदीकी कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि पदाधिकारी से भी जानकारी ले सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक फेरोमोन ट्रैप एक खास तरह की गंध छोड़ते हैं, जो नर कीटों को आकर्षित करके जाल में फंसा लेते हैं, जिससे कीटों का प्रजनन चक्र टूट जाता है। वहीं स्टिकी और फ्रूट फ्लाई ट्रैप चिपचिपी सतह या आकर्षक गंध के जरिए कीटों को पकड़ते हैं। इन उपकरणों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनसे फसल, मिट्टी और आसपास के पर्यावरण पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, जबकि रासायनिक छिड़काव से यह खतरा बना रहता है।
75 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से इन उपकरणों की वास्तविक लागत किसानों के लिए काफी कम हो जाती है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इन्हें अपना सकते हैं। कृषि विभाग का मानना है कि इससे न सिर्फ किसानों की जेब पर बोझ घटेगा, बल्कि दीर्घकाल में मिट्टी की सेहत और उपज की गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जो निर्यात योग्य फल-सब्जियों के लिए खासतौर पर जरूरी है।