एग्रीवेट: वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है. देश में कपास की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है, जबकि मांग कमजोर बनी हुई है. इसके अलावा, बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है. वहीं, वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों में नरमी का असर घरेलू बाजार पर भी दिख रहा है. व्यापार जगत के मुताबिक, घरेलू कपास के भाव हाल के करीब 70,000 रुपये प्रति कैंडी से घटकर अब 64,500-65,500 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर आ गए हैं. एक कैंडी में 356 किलो कपास होता है.
वहीं, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की नीलामी में 2025-26 फसल के कपास के भाव भी पिछले दो दिनों में करीब 1,200 रुपये प्रति कैंडी घटे हैं. इसके अलावा, कपास के बीज के भाव में लगातार गिरावट से भी कच्चे कपास की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है.
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बू्ब ने बिजनेसलाइन से कहा कि कपास के बीज के भाव करीब 300-400 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 4,600-4,700 रुपये के स्तर पर आ गए हैं. उन्होंने कहा कि बाजार में खरीदार काफी धीमे हैं. मिलों की ओर से कपास की गांठों की मांग भी कमजोर है, क्योंकि ज्यादातर मिलों के पास करीब 1 से 1.5 महीने का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने बताया कि बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां और रीसेलर भी 64,500-65,500 रुपये प्रति कैंडी के भाव पर कपास बेच रहे हैं. इस बीच, नई फसल की रोजाना आवक करीब 50,000-55,000 गांठ रहने का अनुमान है. एक गांठ का वजन 170 किलो है. अक्टूबर में नई फसल की आवक और बढ़ने की उम्मीद है.
CotYarn Trade Link के आनंद पोपट ने अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर में कहा कि नई फसल की आवक तेज हो रही है और अक्टूबर में इसमें बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. इससे आने वाले समय में घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, स्पिनिंग मिलों के बाहर पुरानी फसल का सीमित स्टॉक कीमतों को कुछ सहारा दे सकता है.