एग्रीवेट: 27 सितंबर 2026, सारंगढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के गुलाब पटेल ने मछली पालन से कमाए 10-15 लाख रुपये सालाना – सारंगढ़ विकासखंड के गांव नवरंगपुर के किसान गुलाब पटेल आज इलाके में मत्स्य पालन की मिसाल बन चुके हैं। महज 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से वे अब सालाना 10 से 15 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
गुलाब पटेल की यह सफलता प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और राज्य सरकार के सेवा संकल्प अभियान से मिली मदद पर टिकी है। योजना के तहत उन्हें मत्स्य विभाग से 1.20 लाख रुपये का अनुदान मिला, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने तालाब को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने में किया।
शुरुआत में गुलाब पटेल का तालाब पारंपरिक तरीके से चलाया जा रहा था, जिससे उत्पादन और आमदनी दोनों सीमित थे। लेकिन विभागीय मार्गदर्शन में वैज्ञानिक मत्स्य पालन तकनीक अपनाने के बाद उनके 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से अब हर साल करीब 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। इसी उत्पादन से उन्हें सालाना 10 से 15 लाख रुपये की कमाई हो रही है, जो इलाके के कई बड़े किसानों की आमदनी से भी अधिक है।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गुलाब पटेल ने योजना के तहत मिले अनुदान का सही इस्तेमाल करते हुए तालाब की गहराई, पानी की गुणवत्ता और मछली के बीज की नस्ल पर खास ध्यान दिया, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।
छत्तीसगढ़ सरकार का सेवा संकल्प अभियान जमीनी स्तर पर किसानों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गुलाब पटेल जैसे किसानों को चिन्हित कर मत्स्य सम्पदा योजना से जोड़ा गया। अधिकारियों का कहना है कि इलाके के अन्य किसान भी अब गुलाब पटेल से प्रेरित होकर मत्स्य पालन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, और विभाग को नई मांग को देखते हुए आगे और अनुदान आवेदन मिलने की उम्मीद है।
गुलाब पटेल का कहना है कि योजना से मिली शुरुआती मदद के बिना यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था, और अब वे अपने अनुभव को आसपास के गांवों के किसानों के साथ साझा कर रहे हैं ताकि और लोग भी इस मॉडल को अपना सकें।
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका मकसद देश में मछली उत्पादन बढ़ाना, मत्स्य किसानों की आमदनी दोगुनी करना और तालाब, हैचरी व प्रसंस्करण जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाना है। योजना के तहत तालाब निर्माण, मछली बीज और उपकरणों की खरीद पर अनुदान दिया जाता है, जिससे छोटे किसान भी कम पूंजी में मत्स्य पालन शुरू कर सकें।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां पारंपरिक रूप से धान की खेती ही मुख्य आजीविका रही है, वहां मत्स्य पालन को एक वैकल्पिक और अतिरिक्त आय स्रोत के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। खेत के एक कोने में बने छोटे तालाब से भी अच्छी आमदनी हो सकती है, बशर्ते वैज्ञानिक तरीके से बीज, चारा और पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन किया जाए।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गुलाब पटेल जैसे किसानों की सफलता से इलाके में मत्स्य पालन को लेकर धारणा बदल रही है। पहले जहां किसान इसे जोखिम भरा और सिर्फ बड़े तालाब मालिकों का काम मानते थे, वहीं अब छोटे भूमि क्षेत्र वाले किसान भी सरकारी अनुदान की मदद से इसमें हाथ आजमाने को तैयार हो रहे हैं।