एग्रीवेट: जलवायु परिवर्तन के चलते विपरीत मौसम घटनाएं देखी जा रही हैं. क्लाइमेट चेंज के असर के रूप में अल नीनो ने सूखा पैदा किया है और कृषि क्षेत्र के लिए भारी तबाही मचाई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कई राज्य सूखा और अतिरिक्त बाढ़ के हालातों का सामना कर रहे हैं. हम जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को देख रहे हैं और हमे इससे निपटने के लिए तैयार होना होगा. उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है, लेकिन हम इससे बाहर निकल जाएंगे. जिन किसानों को फसलों का नुकसान हुआ है उन्हें केंद्र की ओर से सहायता दी जाएगी.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के नागपुर दौरे पर कहा कि केंद्र सरकार सूखे और बाढ़ से प्रभावित राज्यों के किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी. कम बारिश से महाराष्ट्र का 74 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में हैं और 34 जिलों की 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. केंद्रीय मंत्री पीटीआई से बातचीत में कहा कि उनका मंत्रालय सूखे की स्थिति को लेकर महाराष्ट्र सरकार के लगातार संपर्क में है.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश के कुछ राज्य बाढ़ से जूझ रहे हैं, जबकि कुछ अन्य राज्य सूखे का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को देख रहे हैं और हमें इनसे निपटना होगा. उन्होंने कहा कि जलवायु बदलाव के नतीजे में हम अल नीनो की स्थितियों को लगातार मजबूत होते देख रहे हैं. ज्यादातर हिस्सों में इसके असर के चलते सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलवायु बदलाव के प्रतिकूल प्रभावों से पीड़ित किसानों को बचाने के लिए हम दो तरह के काम कर रहे हैं. पहला, सूखे की स्थिति वाले क्षेत्रों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अन्य संबंधित संस्थानों ने प्रत्येक जिले के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं. हमने इन्हें राज्य सरकारों के साथ साझा किया है और जिलों को भी इसकी जानकारी दी है. अगर बारिश कम होती है तो इन योजनाओं में किसानों को बताया गया है कि कम समय में कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं, किन फसलों में कम पानी की जरूरत होती है और क्या उपाय किए जाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने बीज बैंक भी स्थापित किए हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई फसल खराब हो जाती है तो हमने अगली फसल के लिए विकल्प तैयार किए हैं और अंतरिम व्यवस्था की है. हमने राज्य सरकारों को परामर्श भी जारी किए हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बारे में उन्होंने कहा कि किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है, लेकिन हम इससे बाहर निकल जाएंगे.