एग्रीवेट: Dairy Farming: डेयरी फार्मिंग शुरू करने या मौजूदा कारोबार को बढ़ाने वाले पशुपालक देसी नस्ल की साहीवाल गाय को विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं. यह नस्ल दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है और गर्म मौसम में भी बेहतर तरीके से पाली जा सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (कृषि विज्ञान केंद्र, नोएडा) के अनुसार, अच्छी नस्ल के साथ संतुलित आहार, साफ-सफाई और नियमित पशु स्वास्थ्य देखभाल डेयरी की उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है. देसी नस्लों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नंदिनी योजना भी संचालित हैं.
देश में गायों की कई देसी नस्लें पाई जाती हैं, जिनमें साहीवाल, थारपारकर और गिर प्रमुख हैं. इनमें साहीवाल को दूध उत्पादन के लिहाज से उपयोगी नस्ल माना जाता है. पशुपालक अपने क्षेत्र की जलवायु और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए इस नस्ल का चयन कर सकते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, डेयरी में सिर्फ नस्ल का चुनाव ही पर्याप्त नहीं होता. पशुओं को उनकी जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार, पर्याप्त पानी और साफ रहने की जगह उपलब्ध कराना भी जरूरी है. नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर टीकाकरण से पशुओं को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है.
देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनमें नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नंदिनी योजना शामिल हैं. पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं के तहत परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है. मिनी नंदिनी योजना के तहत 10 गायों की डेयरी स्थापित करने की योजना है. इससे पशुपालकों को संगठित तरीके से डेयरी व्यवसाय शुरू करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, अनुदान की पात्रता, स्वीकृति और अन्य शर्तें योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होती हैं.
योजना के तहत एक जिले में शुरुआती चरण में पांच डेयरी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था. सभी पांच डेयरी के प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं और प्रत्येक डेयरी के लिए 25 पशुओं की खरीद भी कराई गई है. योजना के तहत काम को देखते हुए पांच अतिरिक्त डेयरी का लक्ष्य भी दिया गया है. अतिरिक्त लक्ष्य वाली डेयरियों में चार की दर स्वीकृत हो चुकी है, जबकि शेष एक डेयरी की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है. इससे स्थानीय स्तर पर डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने और देसी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
मिनी नंदिनी योजना के तहत 10 गायों वाली डेयरी स्थापित करने का प्रावधान है. इस योजना में भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक काम होने की जानकारी सामने आई है. पात्र पशुपालकों को योजना के नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने का प्रावधान है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के मुताबिक, डेयरी शुरू करने से पहले पशुपालकों को नस्ल चयन के साथ चारा, पानी, आवास, स्वास्थ्य देखभाल और बाजार की व्यवस्था का भी आकलन करना चाहिए. अच्छी प्रबंधन व्यवस्था के साथ देसी नस्ल की गायों पर आधारित डेयरी पशुपालकों के लिए नियमित आय का माध्यम बन सकती है.