एग्रीवेट: पंजाब में धान की सरकारी खरीद को लेकर मंडियों में तैयारियां शुरू हो गई हैं. मोहाली जिले में 1 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू होगी. इसके लिए 18 खरीद केंद्र बनाए गए हैं. वहीं, कुछ किसानों ने अगेती धान की कटाई शुरू कर दी है. इसे देखते हुए प्रशासन ने पराली जलाने पर रोक और फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर दिया है. नमी को देखते हुए जिले में रात 7 बजे से सुबह 9 बजे तक कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक रहेगी.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी धान खरीद सीजन की तैयारियों की समीक्षा के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के प्रधान सचिव ने ऑनलाइन बैठक की. बैठक में मोहाली की उपायुक्त कोमल मित्तल और सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में धान खरीद की तैयारियों और किसानों की सुविधा से जुड़े इंतजामों की समीक्षा की गई.
बैठक में धान की सरकारी खरीद को सुचारू बनाने, तय नमी मानकों का पालन कराने और पराली जलाने पर रोक लगाने को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई. इसके अलावा पड़ोसी राज्यों से धान की अवैध आवक रोकने पर भी चर्चा हुई. वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पड़ोसी राज्यों से कम कीमत पर धान खरीदकर पंजाब की मंडियों में उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने की कोशिश को रोकने के लिए जिले में 6 चेकपोस्ट बनाए गए हैं.
ये चेकपोस्ट झरमड़ी बैरियर, लालड़ू; बस स्टैंड, हंडेसरा; सिसवां टी-पॉइंट, माजरा; सेखों बैंक्वेट, ढकोली, जीरकपुर; बहेरा मोड़, डेराबस्सी और रामगढ़-दफरपुर रोड, मुबारिकपुर में बनाए गए हैं. पंजाब की मंडियों में पड़ोसी राज्यों से धान की अवैध आवक रोकने के लिए जिले में चेकपोस्ट बनाए गए हैं. इन चेकपोस्ट के जरिए दूसरे राज्यों से आने वाले धान की निगरानी की जाएगी, ताकि सरकारी खरीद व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी न हो.
वहीं, जालंधर जिले की अनाज मंडियों में धान की अगेती आवक शुरू हो गई है. यहां पर सरकार की ओर से धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू की जानी है. इससे पहले ही मंडियों में करीब 3,000 क्विंटल धान पहुंच चुका है. हालांकि, अभी सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के प्रधान कृषि विज्ञानी (धान) डॉ. बूटा सिंह ढिल्लों ने कहा कि मंडियों में पहुंच रहा धान मुख्य रूप से कम अवधि वाली PR 126 किस्म का है. जिन किसानों ने इस किस्म की बुवाई तय समय से पहले की थी, उन्होंने फसल काट ली है. कई किसान अगली फसल की तैयारी के लिए खेत खाली कर रहे हैं.