एग्रीवेट: देश के जूट उद्योग के लिए यह वित्त वर्ष बेहतर रहने की उम्मीद है. क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, पिछले दो साल से कमजोर मांग, महंगे कच्चे माल और कम मुनाफे की समस्या झेल रहे जूट उद्योग में अब सुधार के संकेत मिल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग बढ़ने, निर्यात के बेहतर होने और कच्चे जूट की कीमतों में नरमी से उद्योग को फायदा मिल सकता है. इससे कंपनियों की बिक्री और मुनाफे में सुधार होने की उम्मीद है. इस वित्त वर्ष जूट उद्योग की बिक्री मात्रा में करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है. इससे पहले के दो वित्त वर्षों में बिक्री में हर साल औसतन 10 फीसदी की गिरावट आई थी.
जूट उद्योग की कुल आय में घरेलू बाजार की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है. क्रिसिल के मुताबिक, इस वित्त वर्ष घरेलू मांग करीब 20 फीसदी बढ़ सकती है. इससे पिछले दो वर्षों में मांग में आई करीब 20 फीसदी की संयुक्त गिरावट की भरपाई होने की उम्मीद है.
जूट उद्योग में पिछले दो साल के दौरान कच्चे जूट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से परेशानी बढ़ी थी. कंपनियों ने बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला, जिससे जूट उत्पाद महंगे हो गए. इसका असर मांग पर पड़ा और ग्राहकों ने कम कीमत वाले दूसरे पैकेजिंग विकल्पों का रुख किया. अब कच्चे जूट की कीमतों में नरमी आने से जूट उत्पादों के दाम भी कम होने की उम्मीद है. इससे मांग में सुधार हो सकता है और उद्योग को राहत मिल सकती है.
क्रिसिल के मुताबिक, जूट उत्पादों की निर्यात मांग में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं. होम टेक्सटाइल, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स और दूसरे वैल्यू-एडेड जूट उत्पादों की मांग बढ़ने से निर्यात को सहारा मिल सकता है. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले अमेरिका के ऊंचे टैरिफ में कमी आने से भारतीय जूट उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बेहतर हो सकती है.
क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर राहुल गुहा ने कहा कि मांग बढ़ने से उद्योग की बिक्री में सुधार होगा, लेकिन कच्चे माल की लागत घटने से मुनाफे पर इससे भी बड़ा असर पड़ सकता है. बेहतर फसल उत्पादन से देश में कच्चे जूट की उपलब्धता बढ़ी है. इससे आयात कम रहने के बावजूद इसकी कीमतों में नरमी आई है. कच्चा जूट जूट उद्योग की कुल परिचालन लागत में करीब 60-65 फीसदी हिस्सेदारी रखता है.
क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, कच्चे जूट की कीमतों में नरमी और फैक्ट्रियों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होने से जूट कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है. इस वित्त वर्ष उद्योग का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 1.30 प्रतिशत बढ़कर 9 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. पिछले वित्त वर्ष कच्चे जूट की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी. इसकी वजह सप्लाई में कमी थी. हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ने से किसानों ने जूट की खेती का रकबा बढ़ाया. इससे इस साल उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है और कच्चे जूट की उपलब्धता बढ़ी है.
क्रिसिल के मुताबिक, इस वित्त वर्ष मुनाफे में सुधार और कर्ज लेकर कम निवेश किए जाने से जूट कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है. कंपनियां अपने कारोबार से होने वाली कमाई के जरिए रखरखाव पर होने वाला खर्च और रोजमर्रा की कार्यशील पूंजी की जरूरत आसानी से पूरी कर सकेंगी. जूट कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर विस्तार करने से परहेज किया है. इसके बजाय कंपनियों ने धीरे-धीरे मशीनों के आधुनिकीकरण और कामकाज को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है.