एग्रीवेट: Mustard Sowing Decline: रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए इस बार बुवाई के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. पिछले साल के मुकाबले इस बार अब तक सरसों की बुवाई करीब आधी रह गई है. हैरानी की बात यह है कि बाजार में सरसों के अच्छे दाम मिल रहे हैं और सरकार ने भी इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाया है. इसके बावजूद किसान अब तक बड़े रकबे में इसकी बुवाई नहीं कर पाए हैं.
इसकी एक बड़ी वजह समय पर बारिश न होना और खेतों में नमी की कमी रही है. हालांकि, हाल में हुई बारिश के बाद अब बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है. ऐसे में सवाल है कि आखिर सरसों की खेती किन राज्यों में सबसे ज्यादा पिछड़ी है और इस बार किसानों ने कितने रकबे में बुवाई की है?
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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक देश में सिर्फ 20.50 लाख हेक्टेयर में रेपसीड और सरसों की बुवाई हुई है. जबकि पिछले साल इसी समय तक 38.07 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी थी. यानी इस बार सरसों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 46.16 फीसदी कम है. आमतौर पर रबी सीजन में सरसों की बुवाई अक्टूबर से शुरू होकर नवंबर तक चलती है. ऐसे में अभी किसानों के पास बुवाई का समय बाकी है.
सरसों की बुवाई धीमी होने के बीच अच्छी बात यह है कि बाजार में किसानों को इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं. राजस्थान की अलग-अलग मंडियों में सरसों का भाव करीब 7,600 से 9,300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा है. वहीं, सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए सरसों का MSP बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. पिछले साल यह 6,200 रुपये था. इसके बावजूद बुवाई में तेजी नहीं आई. इसकी मुख्य वजह मौसम की स्थिति रही है. समय पर बारिश नहीं होने से कई इलाकों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई. ऐसे में किसानों को बुवाई टालनी पड़ी.
देश में सरसों की सबसे ज्यादा खेती राजस्थान में होती है, लेकिन इस बार यहां भी बुवाई काफी पीछे है. पिछले साल 30 अक्टूबर तक राज्य में 22.06 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई जा चुकी थी, जबकि इस बार अभी तक सिर्फ 8.91 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है. यानी राजस्थान में सरसों का रकबा 59.61 फीसदी कम है.
उत्तर प्रदेश में भी सरसों की बुवाई पिछले साल के 13.33 लाख हेक्टेयर से घटकर 10.38 लाख हेक्टेयर रह गई है. यहां रकबा 22.19 फीसदी पीछे चल रहा है. वहीं, हरियाणा में स्थिति और ज्यादा धीमी है. पिछले साल यहां 2.15 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, लेकिन इस बार अब तक सिर्फ 60 हजार हेक्टेयर में ही सरसों बोई गई है.
उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और असम में भी सरसों की खेती का रकबा पिछले साल से कम है. असम में पिछले साल 13 हजार हेक्टेयर के मुकाबले इस बार सिर्फ 4 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में तस्वीर अलग है. यहां सरसों का रकबा 23 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 37 हजार हेक्टेयर हो गया है.