एग्रीवेट: भारत में कपास का आयात मार्केटिंग ईयर 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) में एक नया रिकॉर्ड बना सकता है. केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से मिलने वाली छूट दिसंबर के अंत तक बढ़ा दी है. इससे कपड़ा मिलों को विदेश से सस्ती और साफ कपास खरीदने में मदद मिलेगी. वहीं, देश में कपास की फसल का रकबा घटने और प्रमुख उत्पादक राज्यों में सूखे के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 में भारत का कपास आयात पिछले साल के 71 लाख गांठ के बराबर या उससे अधिक हो सकता है. एक गांठ में 170 किलो कपास होती है. सरकार की ओर से सीमा शुल्क में छूट बढ़ाए जाने से कपड़ा मिलों को कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली कपास मिल सकेगी. साथ ही, कपास में कचरा और दूसरी अशुद्धियां होने की समस्या भी कम होगी. इससे पहले सितंबर 2026 में समाप्त हुए मार्केटिंग ईयर में भारत का कपास आयात रिकॉर्ड 71 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है. यह इससे पिछले साल के 41 लाख गांठ के मुकाबले काफी अधिक है. यानी एक साल में कपास के आयात में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन. कोटक के मुताबिक, कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट बढ़ाने से भारतीय कपड़ा मिलों को फायदा होगा. उन्हें विदेश से साफ और अच्छी गुणवत्ता वाली कपास मिल सकेगी. इससे बांग्लादेश और चीन जैसे देशों के मुकाबले भारतीय कपड़ा उत्पादों की कीमत और गुणवत्ता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि इस साल देश में कपास की फसल पिछले साल के मुकाबले कम रहने का अनुमान है. ऐसे में आयात बढ़ने की संभावना है.
केंद्र सरकार ने शुक्रवार देर रात कपास के आयात पर सीमा शुल्क से छूट की अवधि दो महीने बढ़ा दी. पहले यह छूट 31 अक्टूबर 2026 तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है. सरकार ने कपड़ा उद्योग को कपास की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया है. इससे पहले 1 जून से 31 अक्टूबर तक कपास पर लगने वाला 11 फीसदी सीमा शुल्क हटा दिया गया था. धालक्ष्मी ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) अतुल गणात्रा ने भी इस फैसले को कपड़ा उद्योग के लिए फायदेमंद बताया. उनके मुताबिक, भारत ने मार्केटिंग ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड 71 लाख गांठ कपास का आयात किया था. इस दौरान देश में कपास का उत्पादन करीब 330 लाख गांठ रहा था. इससे पता चलता है कि घरेलू मांग काफी अधिक है.
गणात्रा ने कहा कि मार्केटिंग ईयर 2026-27 में देश में कपास का उत्पादन करीब 280 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि खपत बढ़कर 365 लाख गांठ तक पहुंच सकती है. पिछले साल कपास की खपत करीब 315 लाख गांठ थी. ऐसे में घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर को पूरा करने के लिए आयात बढ़ाना जरूरी होगा. उन्होंने कहा कि दिसंबर के अंत तक आयात शुल्क में छूट बढ़ाना सही फैसला है.
राधालक्ष्मी ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अतुल गणात्रा के मुताबिक, भारत में कपास की खपत बढ़ने की एक बड़ी वजह कपड़ा मिलों का सिंथेटिक धागे से सूती धागे की ओर रुख करना है. पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. इससे सिंथेटिक धागा महंगा हो गया है. गणात्रा ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद पॉलिएस्टर और विस्कोस की कीमतों में करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में कपड़ा मिलें सूती धागे को ज्यादा पसंद कर रही हैं.