एग्रीवेट: 02 नवंबर 2026, कोटपूतली: राजस्थान के लेख राम यादव ने जैविक खेती और एग्री-टूरिज्म से बनाया 17 करोड़ का कारोबार – परंपरागत किसान परिवार से आने वाले लेख राम यादव ने जैविक खेती, देसी डेयरी और एग्री-टूरिज्म को जोड़कर एक बड़ा कृषि कारोबार खड़ा किया है। करीब पांच साल पहले 120 एकड़ से शुरू हुई उनकी खेती आज राजस्थान के जयपुर, नागौर और जैसलमेर तथा गुजरात के बोटाद जिले में फैलकर 1,100 एकड़ से ज्यादा तक पहुंच गई है।
उनके खेतों में अनाज, फल, सब्जियां और मसाले उगाए जाते हैं। लेख राम ने अपनी खेती की शुरुआत एलोवेरा की फसल से की थी, जिसमें उन्हें शुरुआती दौर में नुकसान झेलना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपने खेती के तरीके में कई बदलाव किए।
तेलंगाना में अरहर की फसल में उकठा रोग का खतरा, जड़ सड़न से बचाव की सलाह—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट
लेख राम अपने खेतों में तारा चंद बेलजी तकनीक (टीसीबीटी) अपनाते हैं, जिसे नैनोटेक्नोलॉजी और ऊर्जा विज्ञान पर आधारित बताया जाता है। इसके साथ ही वे प्राचीन भारतीय कृषि पद्धति वृक्षायुर्वेद के तरीके भी इस्तेमाल करते हैं, जिनमें राख और प्राकृतिक जैव-रसायनों का उपयोग होता है।
लेख राम देसी साहीवाल गायों का पालन करते हैं, जिनसे मिलने वाले A2 दूध से घी और पनीर जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उनकी डेयरी को A2 दूध उत्पादन के लिए प्रमाणित भी किया गया है।
इसके अलावा उन्होंने 22 एकड़ में “56 भोग वाटिका” नाम से एक एग्री-टूरिज्म यूनिट भी बनाई है, जो राजस्थान के कृषि पर्यटन विभाग में पंजीकृत है। उनकी कंपनी “यूबी ऑर्गेनिक इंडिया” इन सभी उत्पादों को ऑनलाइन और ऑफलाइन बेचती है, और इस पूरे कारोबार का सालाना टर्नओवर अब 17 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इस काम के लिए उन्हें एमएफओआई अवॉर्ड्स 2024 में राष्ट्रीय श्रेणी में “मिलियनेयर ऑर्गेनिक फार्मर ऑफ इंडिया” का सम्मान भी मिला।
लेख राम ने अपने कृषि सफर की शुरुआत एलोवेरा की खेती से की थी, लेकिन बाजार और प्रबंधन से जुड़ी दिक्कतों के कारण उन्हें शुरुआती दौर में नुकसान झेलना पड़ा। इस अनुभव के बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अनाज, फल, सब्जी, मसाले, डेयरी और पर्यटन को मिलाकर आय के कई जरिए बनाने पर ध्यान दिया।
जयपुर, नागौर, जैसलमेर और गुजरात के बोटाद जिले में फैले उनके खेतों के प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर कई लोगों को रोजगार मिला है। एग्री-टूरिज्म यूनिट में आने वाले पर्यटकों को खेती के तरीके, देसी गायों की डेयरी और जैविक उत्पाद बनाने की प्रक्रिया दिखाई जाती है, जिससे किसानों की आमदनी के साथ-साथ जैविक खेती को लेकर आम लोगों में जानकारी भी बढ़ती है।
लेख राम का मानना है कि आने वाले वर्षों में खेती के साथ प्रोसेसिंग, डेयरी और पर्यटन को जोड़ने वाला मॉडल छोटे व मझोले किसानों के लिए भी अपनाने लायक बन सकता है, बशर्ते शुरुआती चरण में सही तकनीकी मार्गदर्शन मिले।
उनके इस काम को कृषि क्षेत्र में बड़े मंच पर पहचान भी मिली है। एमएफओआई अवॉर्ड्स 2024 में मिला “मिलियनेयर ऑर्गेनिक फार्मर ऑफ इंडिया” सम्मान देशभर के जैविक किसानों के बीच उनकी पहचान को और मजबूत करता है। लेख राम का कहना है कि जैविक खेती में शुरुआती कुछ साल मुश्किल होते हैं, लेकिन मिट्टी और बाजार दोनों के साथ धीरज रखने पर नतीजे बेहतर मिलते हैं।