अक्टूबर में लगाएं पपीते की फसल, एक एकड़ में 1240 पौधे, सही देखभाल से 18 लाख तक कमाई – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Papaya Farming: बरसात के बाद सितंबर और अक्टूबर का समय पपीते की खेती शुरू करने के लिए अनुकूल माना जाता है. मौसम में बदलाव और तापमान में धीरे-धीरे नरमी आने से पौधों की शुरुआती बढ़वार के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं. किसान ताइवान रेड लेडी जैसी उन्नत किस्मों की खेती कर अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. उचित देखभाल, सही सिंचाई और रोग-कीट प्रबंधन के साथ पपीते की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बन सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, खेती शुरू करने से पहले मिट्टी, जल निकासी और पौधों की दूरी का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

पपीते की खेती में पौधों की संख्या  और उनके बीच उचित दूरी का उत्पादन पर असर पड़ता है. एक एकड़ जमीन में करीब 1240 पौधे लगाए जा सकते हैं. सही तरीके से देखभाल करने पर एक पौधे से करीब 50 किलो तक फल मिलने की संभावना रहती है. आमतौर पर पौधों में करीब एक साल के भीतर अच्छा फलन शुरू हो सकता है. उत्पादन और बाजार भाव बेहतर रहने पर एक एकड़ से सालाना 15 से 18 लाख रुपये तक की आमदनी संभव बताई जाती है. हालांकि वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव और खेती की लागत पर निर्भर करेगी.

पपीते की खेती  के लिए बलुई दोमट या हल्की काली मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है. मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.0 के बीच रहना बेहतर होता है. पौधों की रोपाई से पहले खेत में करीब 50×50×50 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जा सकते हैं. गड्ढे खोदने के बाद उन्हें दो से तीन दिन तक खुला छोड़ना उपयोगी माना जाता है. इससे मिट्टी को धूप मिलने का समय मिलता है. इसके बाद आवश्यक तैयारी करके पौधों की रोपाई की जा सकती है.

पपीते के पौधों को पर्याप्त जगह मिलने से उनकी बढ़वार और खेत में हवा का आवागमन  बेहतर रहता है. खेती में पौधे से पौधे की दूरी करीब 6 फीट और एक कतार से दूसरी कतार की दूरी भी लगभग 6 फीट रखी जा सकती है. उचित दूरी होने से किसानों को पौधों की निराई-गुड़ाई, सिंचाई और निगरानी में भी आसानी होती है. साथ ही खेत में अत्यधिक घनत्व के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है.

अक्टूबर तक पपीते के पौधों की रोपाई  के बाद जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई की जा सकती है. इसके बाद मिट्टी में मौजूद नमी और मौसम की स्थिति को देखते हुए पानी देना चाहिए. सामान्य परिस्थितियों में करीब एक सप्ताह से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन मिट्टी और मौसम के अनुसार अंतर बदल सकता है. पपीते के पौधे जलभराव के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए खेत में अतिरिक्त पानी जमा न होने दें और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था रखें. इसके अलावा पौधों की नियमित निगरानी करें और कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रबंधन करें. सही मिट्टी, उचित दूरी, संतुलित सिंचाई और नियमित देखभाल से पपीते की खेती में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है.

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