एग्रीवेट: सूखा और कर्ज की वजह से महाराष्ट्र के लातूर, परभणी में सितंबर से अब तक 2 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली है. इन मामलों में कर्ज वसूली और गुंडागर्दी के आरोप मृतक किसानों के परिजनों ने लगाए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित किसानों से कर्ज की किस्तें नहीं लेने के आदेश मुख्यमंत्री की ओर से माइक्रो फाइनेंस कंपनियों, निजी और सरकारी बैंकों को जारी किए गए हैं. लेकिन, फाइनेंसर निर्देशों की अवहेलना कर किसानों से जबरन कर्ज की वसूली कर रहे हैं. इसके विरोध में क्रांतिकारी शेतकारी संगठन नेतृत्व में किसानों ने नांदेड़ में दो वित्तीय कंपनियों के दफ्तर में हंगामा किया और तोड़फोड़ की.
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भीषण सूखे के बावजूद जबरन कर्ज वसूली करने का आरोप लगाते हुए एक किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को नांदेड़ जिले में दो वित्त कंपनियों के कार्यालयों में तोड़फोड़ की. क्रांतिकारी शेतकरी संगठन के कार्यकर्ताओं ने लोहा में श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस के कार्यालयों में तोड़फोड़ की. किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने का आरोप है कि राज्य के कई हिस्सों में भीषण सूखा पड़ने के बावजूद ये कंपनियां जबरन कर्ज वसूल रही हैं.
Gold Rate: धनतेरस से पहले सस्ता हुआ सोना, एक सप्ताह में 3,700 रुपये तक गिरे दाम, चांदी भी लुढ़की – एग्रीवेट
क्रांतिकारी शेतकारी संगठन के कार्यकर्ताओं ने नांदेड़ जिले के लोहा (Loha) इलाके में श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस के दफ्तरों में तोड़फोड़ की. संगठन के जिला प्रमुख बालासाहेब जाधव ने मीडिया को बताया कि किसानों से मिली शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि रिकवरी एजेंट उन्हें परेशान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी शेतकारी संगठन के नेता श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस के दफ्तरों में गए थे, लेकिन वहां मिले जवाबों से वे संतुष्ट नहीं हुए. इसके बाद लाठियों से लैस कुछ कार्यकर्ताओं ने दफ्तरों के दरवाजे, मेज, कंप्यूटर और अन्य फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया.
बालासाहेब जाधव ने पीटीआई से कहा कि अगर फाइनेंस कंपनियों के एजेंट गांवों में जाकर किसानों से जबरन कर्ज वसूलते रहे, तो हम अपना आंदोलन और तेज कर देंगे, यहां तक कि उनके दफ्तरों में आग भी लगा देंगे. निजी फाइनेंस कंपनियों के एजेंट सुबह 8 बजे ही गांवों में पहुंच जाते हैं और कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान करते हैं. उन्होंने दावा किया कि दबाव इतना बढ़ गया है कि कुछ ग्रामीण इस परेशानी से बचने के लिए अपना घर छोड़कर जा रहे हैं.
सहायक निरीक्षक आदित्य घोडके ने कहा कि दोनों कंपनियों से शिकायतें मिलने के बाद इस घटना पर कार्रवाई की जाएगी. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के दबाव के कारण नांदेड़ जिले के किसान चंद्रकांत शिंदे और लातूर जिले के किसान दत्तात्रेय कुंभार की मौत के आरोप लग रहे हैं. पिछले महीने एक फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में चंद्रकांत शिंदे मृत पाए गए थे, जिसके बाद हत्या और अपहरण का मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में कंपनी से जुड़े कई लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है. बीते 26 अक्टूबर को दत्तात्रेय कुंभार अपने घर अंकुलगा रानी गांव में फंदे से लटके पाए गए थे. पुलिस के अनुसार वे निजी फाइनेंस कंपनियों से लिए गए कर्ज को न चुका पाने के कारण परेशान थे.