एग्रीवेट: हरियाणा के करनाल में धान खरीद को लेकर सवाल उठ रहे हैं. किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि ज्यादा नमी बताकर उनका धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 100 से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर खरीदा गया. हालांकि, इसके बावजूद उनके बैंक खातों में पूरी MSP की रकम जमा की गई. किसानों का दावा है कि अब कुछ आढ़ती उनसे MSP के तहत मिली रकम और धान की वास्तविक खरीद कीमत के बीच का अंतर वापस मांग रहे हैं. किसानों ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार की रोक के बावजूद खरीद की मात्रा और भाव का ब्योरा देने वाली कच्ची पर्चियां जारी की जा रही हैं.
किसानों ने धान खरीद में पारदर्शिता की मांग की है. उनका कहना है कि किसानों के खातों में पूरी MSP की रकम भेजकर बाद में उसका कुछ हिस्सा वापस मांगने के बजाय, धान की वास्तविक खरीद कीमत सीधे उनके खातों में जमा की जानी चाहिए. भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) की प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य जगदीप सिंह औलख ने द ट्रिब्यून से कहा कि सरकार को धान खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए. अगर धान 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जाता है, तो किसान के खाते में भी इतनी ही रकम जमा होनी चाहिए. वहीं, अगर खरीद MSP पर होती है, तो किसानों को पूरी MSP मिलनी चाहिए.
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भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने किसानों से MSP और वास्तविक खरीद कीमत के बीच का अंतर वापस नहीं करने की अपील की. उन्होंने कहा कि ज्यादा नमी का बहाना बनाकर किसानों की मेहनत की कमाई वापस लेने या MSP में कटौती करने का किसी को अधिकार नहीं है. वहीं, भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने किसानों के खातों में पूरी MSP की रकम जमा कर दी है, तो उनसे पैसे वापस क्यों मांगे जा रहे हैं. उन्होंने पूछा कि क्या यह रकम धान में ज्यादा नमी के कारण हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर वसूली जा रही है या फिर इसी आधार पर MSP से कम कीमत पर खरीद को सही ठहराया जा रहा है.
वहीं, आढ़तियों ने इस प्रक्रिया का बचाव किया है. नाम न बताने की शर्त पर एक आढ़ती ने कहा कि खराब मौसम की आशंका के चलते किसान 25 से 30 फीसदी नमी वाला धान मंडियों में लेकर पहुंचे थे. ऐसे में आढ़तियों ने धान की खरीद कराने के लिए चावल मिल मालिकों से संपर्क किया था. करनाल के उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि धान खरीद में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर प्रशासन कार्रवाई करेगा. उन्होंने किसानों से अपील की कि अगर उन्हें इस तरह की परेशानी हो रही है या खरीद में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है, तो इसकी जानकारी प्रशासन को दें. उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायत की जांच की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी.