एग्रीवेट: केंद्र सरकार ने बीते दिन रबी फसलों के एमएसपी बढ़ोत्तरी की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. गेहूं और चना के कम एमएसपी को लेकर किसान संगठनों में नाराजगी है. इस बीच किसान मजदूर मोर्चा पंजाब (Kisan Mazdoor Morcha) ने फसलों की कीमतों के फैसले पर नाराजगी जताते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी और अन्याय करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है. मोर्चा ने कहा है कि वह 3 अक्तूबर को किसानों के हक और न्याय की मांग को लेकर मार्च निकालेगा. मार्च के दौरान एक हजार से ज्यादा किसानों और मजदूरों के जुटान का दावा किया गया है. मार्च में किसान कैंडल और टॉर्च लाइट लेकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करेंगे.
किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने जारी बयान में कहा कि चंडीगढ़ के किसान भवन में सरवन सिंह पंढेर के नेतृत्व में मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई. पंजाब के कृषि मंत्री के साथ 24 सितंबर को हुई बैठक में सरकार द्वारा लिए गए फैसलों और मानी गई मांगों पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई और आंदोलन के अगले चरण के लिए रणनीति बनाई गई. मोर्चा के नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार को किसानों की मांगें पूरी करने और उन्हें लागू करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया जाएगा. इसके बाद 17 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बड़े, निर्णायक और जोरदार संघर्ष की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जाएगी.
मोर्चा ने लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों की याद में 3 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में कैंडल और टॉर्चलाइट मार्च निकालने का फैसला किया है. यह मार्च किसान भवन से शुरू होकर मटका चौक तक जाएगा. इस मार्च के जरिए लखीमपुर खीरी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देने की मांग उठाई जाएगी. मार्च में लगभग 1,000 किसानों और मजदूरों के शामिल होने की उम्मीद है. इसके अलावा 6 अक्टूबर को कश्मीर में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की बैठक होगी, जिसमें देश भर के किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी.
किसान मजदूर मोर्चा ने रबी फसलों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी को अपर्याप्त बताया है. कहा गया कि केंद्र सरकार की ओर से घोषित रबी फसलों की कीमतों में बढ़ोतरी नाकाफी है. गेहूं के लिए प्रति क्विंटल केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी किसानों की लागत और आय की जरूरतों को देखते हुए अपर्याप्त है. इसे किसानों की उम्मीदों का मजाक बताते हुए मोर्चे ने मांग की कि फसलों की कीमतें डॉ. स्वामीनाथन आयोग के ‘C2 + 50%’ फॉर्मूले के आधार पर तय की जाएं. मोर्चे ने कहा कि इतनी मामूली बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई बुनियादी सुधार नहीं हो सकता, क्योंकि इसमें खेती की लगातार बढ़ती लागत जैसे डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरी का खर्च आदि को ध्यान में नहीं रखा गया है.