एग्रीवेट: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आलू किसानों को मुआवजा देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. पिछली फसल में आलू की बिक्री और कीमतों को लेकर नुकसान उठाने वाले किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज तैयार किया जा रहा है. दक्षिणी जिलों के प्रभावित किसानों को ध्यान में रखकर इस पैकेज का ऐलान 5 नवंबर को हुगली जिले के पुरसुरा से किया जाएगा.
सुवेंदु अधिकारी ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आलू किसानों के लिए मुआवजा पैकेज की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. उन्होंने बताया कि पिछली फसल में नुकसान झेलने वाले दक्षिणी जिलों के किसानों को राहत देने के लिए यह पैकेज तैयार किया जा रहा है. इसका औपचारिक ऐलान 5 नवंबर को हुगली जिले के पुरसुरा से होगा. हालांकि सितंबर में मुख्यमंत्री ने आलू किसानों को 2 रुपये प्रति किलो की दर से सब्सिडी देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि थी. इसी के अनुसार, दीपावली से पहले किसानों के खातों में प्रति किसान कई लाख रुपये तक की राशि जारी की जाएगी.
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देश में आलू उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है. इसके बावजूद पिछले साल आलू के परिवहन और दूसरे राज्यों में बिक्री पर लगी पाबंदियों ने यहां के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. वर्ष 2025 में राज्य से बाहर आलू भेजने पर रोक के कारण किसानों और व्यापारियों को उपज बेचने में परेशानी हुई. किसानों का कहना था कि अच्छी पैदावार के बावजूद दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंच सीमित होने से उन्हें उचित कीमत नहीं मिल सकी. बाद में पाबंदियां हटा ली गईं, लेकिन तब तक कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. अब सरकार इसी नुकसान से प्रभावित किसानों को राहत देने की तैयारी कर रही है.
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्य में बीजेपी की सरकार रहने तक आलू से लदे ट्रकों को दूसरे राज्यों में जाने से नहीं रोका जाएगा. उनका कहना है कि किसानों को अपनी उपज दूसरे राज्यों के बाजारों में बेचने का अवसर मिलना चाहिए. दरअसल, आलू की कीमतें और मांग अलग-अलग राज्यों में बदलती रहती हैं. ऐसे में दूसरे बाजारों तक पहुंच मिलने से किसानों को अपनी उपज बेचने के ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं. परिवहन पर रोक लगने से किसानों को स्थानीय बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है.
पश्चिम बंगाल में आलू की खेती मुख्य रूप से हुगली और उसके आसपास के इलाकों में होती है. पूर्व बर्धमान भी आलू उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है. इन जिलों के किसानों पर पिछले सीजन में बिक्री संबंधी पाबंदियों का असर पड़ा था. ऐसे में 5 नवंबर को घोषित होने वाले मुआवजा पैकेज पर प्रभावित किसानों की नजर रहेगी. किसानों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि सहायता किन जिलों और कितने नुकसान वाले किसानों को मिलेगी. पैकेज की राशि और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी सामने आने के बाद ही राहत का वास्तविक दायरा स्पष्ट होगा.