एग्रीवेट: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को चक्रवात अर्नब से प्रभावित डॉ. बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिले का हवाई सर्वे किया. उन्होंने मुम्मिदिवरम विधानसभा क्षेत्र के गचाकायलापोरा गांव में राहत शिविरों का निरीक्षण किया और चक्रवात प्रभावित लोगों से बातचीत की. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राहत और पुनर्वास के काम में जुटी है. उन्होंने कहा कि चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की टीमें शुक्रवार को आंध्र प्रदेश पहुंचेंगी. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, चक्रवात अर्नब से राज्य को करीब 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. विस्तृत आकलन के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है. हालांकि, मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि फसल बर्बादी की मार झेल रहे किसानों को नारियल और ऑयल पाम के पेड़ों के नुकसान पर प्रति पेड़ 1,500 रुपये दिए जाएंगे.
नायडू ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात कर उन्हें राज्य में चक्रवात से हुए नुकसान की जानकारी दी है. साथ ही, केंद्र सरकार को नुकसान की शुरुआती रिपोर्ट भी सौंप दी गई है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि चक्रवात से प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाएगा. नारियल और ऑयल पाम के जिन पेड़ों को नुकसान पहुंचा है, उनके लिए प्रति पेड़ 1,500 रुपये दिए जाएंगे. राहत शिविरों से घर लौटने वाले परिवारों को 25 किलो चावल, जरूरी सामान का एक पैकेट और तत्काल खर्च के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को पहले ही फसल बीमा दिया जा चुका है. चक्रवात के कारण फसल की पैदावार घटने पर किसानों को बीमा का लाभ मिलेगा. कृषि और बागवानी फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के बाद मुआवजे की राशि जल्द से जल्द किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी. नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले भी कई चक्रवातों का सामना कर चुका है. पिछली आपदाओं से सबक लेते हुए इस बार पहले से सावधानी बरती गई और जान-माल का नुकसान कम करने के लिए कदम उठाए गए. इसके बावजूद चक्रवात में सात लोगों की मौत हुई है. अंबेडकर कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि श्रीकाकुलम से कृष्णा जिले तक हालात पर नजर रखी गई और RTGS के जरिए राहत कार्यों का समन्वय किया गया.
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ महिलाओं ने उनसे शिकायत की कि चक्रवात में उनकी झोपड़ियां ढह गई हैं. इस पर उन्होंने जिला कलेक्टर को क्षतिग्रस्त झोपड़ियों की मरम्मत और उन्हें फिर से तैयार कराने के निर्देश दिए. साथ ही, सरकारी जमीन पर रहने वाले गरीब परिवारों को नियमों के तहत आवासीय पट्टा देने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है